युद्ध अपराध के लिए सज़ा

  • 26 जुलाई 2010
Image caption डच ने माना कि उनकी जेलों में लोगों को यातनाएँ दी गईं

कंबोडिया में बंदूक की नोक पर शासन चलाने वाले संगठन खमेर रूज़ के शासनकाल में जेल प्रबंधन के प्रमुख रहे कॉमरेड डच को युद्ध अपराध का दोषी पाया गया है और उन्हें 35 वर्ष के कारावास की सज़ा सुनाई गई है.

67 वर्षीय डच का पूरा नाम कियांग ग्युक इव है और संयुक्त राष्ट्र के समर्थन से उनके ख़िलाफ़ युद्ध अपराध का मुक़दमा चलाया गया था. कंबोडिया में बड़े पैमाने पर हुई हिंसा के सिलसिले में किसी भी व्यक्ति को दोषी ठहराए जाने का यह पहला मामला है.

कंबोडिया में युद्ध अपराधों के आरोपों की जाँच कर रहे न्यायाधिकरण का यह पहला फ़ैसला है. डच पिछले ग्यारह वर्षों से जेल में बंद थे इसलिए उनकी सज़ा में से 11 साल कम कर दिए गए हैं.

कड़ी सुरक्षा के बीच बुलेटप्रूफ़ दीवार के पीछे बैठे पूर्व जेल अधिकारी काफ़ी शांत थे उन्होंने माना कि उनके कार्यकाल में उनकी निगरानी में जेलों में लोगों को यातनाएँ दी गई थीं लेकिन उनका कहना था कि वे तो सिर्फ़ आदेशों का पालन कर रहे थे.

अभियोजन पक्ष का कहना था कि डच ने लोगों से जबरदस्ती अपराध कबूल करवाने के लिए उन्हें भयंकर यातनाएँ दीं जिनमें हाथ पैर के नाखून उखाड़ने से लेकर बिजली के झटके देना शामिल था.

पाँच सदस्यीय न्यायाधिकरण के प्रमुख ने उनके कारनामों को 'स्तब्ध करने वाला और घृणित' बताया.

इस मुक़दमे का फ़ैसला सुनने के लिए दूर दूर से कंबोडियाई लोग विशेष रुप से बनाए गए अदालत में पहुँचे और इस सुनवाई का टीवी पर भी सीधा प्रसारण किया गया.

ज्यादातर लोगों ने कहा कि उन्हें अदालत से और कड़ी सज़ा की उम्मीद थी, ज़्यादातर लोग चाहते थे कि इस पूर्व जेल अधिकारी को आजीवन कारावास की सज़ा मिलनी चाहिए थी.

कुछ लोग तो इस फ़ैसले से बहुत नाराज़ हुए और कोर्ट से उठकर चले गए लेकिन बहुत सारे लोगों ने इस बात पर संतोष प्रकट किया कि आख़िरकार तीन दशक के बाद ख़मेर रूज़ के किसी शीर्ष अधिकारी को सज़ा तो मिली.

लोगों को उम्मीद है कि बाक़ी दोषियों को भी अपने किए की सज़ा मिलेगी. पोल पॉट के नेतृत्व में चलने वाले खमेर रूज़ प्रशासन ने लाखों लोगों को मौत के घाट उतार दिया था.

1975 से 1979 के बीच शासन चलाने वाले पोल पॉट के कार्यकाल में एक अनुमान के मुताबिक़ बीस लाख राजनीतिक विरोधियों को मार डाला गया था.

1998 में पोल पॉट की मौत हो गई लेकिन उस दौर के कई नेता अभी जीवित हैं जिनके ख़िलाफ़ यह मुक़दमा चल रहा है.

खमेर रूज़ के सत्ता से हटाए जाने के बाद डच लापता हो गए और वेश बदलकर उत्तरपूर्वी कंबोडिया में रहने लगे, पहचान छिपाने के लिए ईसाई बन जाने वाले डच को 1999 में एक ब्रितानी पत्रकार ने संयोगवश ढूँढ निकाला जिसके बाद उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया.