नहीं सताएगा रिटायरमेंट का डर

  • 29 जुलाई 2010
Image caption नियम में बदलाव के लिए कार्यकर्ता लंबे समय से संघर्ष कर रहे थे.

ब्रिटेन की सरकार अक्तूबर 2010 से सेवानिवृत्ति के लिए उम्र की सीमा को ख़त्म करने की योजना बना रही है.

इस प्रस्ताव के अमल में आने के बाद 65 वर्ष की उम्र तक पहुंचते ही कर्मचारियों को जबरन सेवानिवृत्त करना संभव नहीं होगा.

इस नियम में बदलाव के लिए कार्यकर्ता लंबे समय से संघर्ष कर रहे थे. सरकार के इस प्रस्ताव को वो बुजुर्गों के साथ होने वाले अन्याय पर अपनी जीत मान रहे हैं.

फ़िलहाल लागू नियमों के तहत कर्मचारियों को बिना किसी पेंशन या मुआवज़े के जबरन सेवानिवृत्त किया जा सकता है.

नियमों के तहत मालिक सिर्फ़ इस बात के लिए बाध्य हैं कि वो कर्मचारी की 65वीं वर्षगांठ से छह महीने पहले उनसे इस बारे में चर्चा कर लें.

अनसुलझी दिक्कतें

सरकार अगर इस योजना को अमल में लाती है तो ये नियम अगले साल अप्रैल से लागू हो सकेगा. छह अप्रैल 2011 के बाद जबरन रिटायरमेंट को लेकर कोई नया नोटिस जारी नहीं किया जा सकेगा.

इस बीच ब्रिटेन के प्रमुख व्यापार समूह सीबीआई ने इसे जल्दबाज़ी में लिया गया फ़ैसला बताया. उसका मानना है कि कंपनियों को इससे निपटने के लिए कम समय मिलेगा जिससे कई दिक्कतें सामने आएंगी.

सरकार पर इस फ़ैसले के लिए दबाव बनाने वाले संगठन ‘चैरिटी ऐज यूके’ के प्रवक्ता ने कहा, "ये उन हज़ारों कर्मचारियों की जीत है जिन्हें 65 वर्ष का होते ही नौकरी से निकाले जाने का डर सताता है."

सरकार को उम्मीद है कि इस नियम के बाद लोग लंबे समय तक काम करेंगे. इससे वृद्धावस्था से जुड़ी सामाजिक-आर्थिक समस्याओं का हल भी निकलेगा.

दुनियाभर में कई देशों के नागरिक रिटायरमेंट की उम्र घटाने की मांग करते रहे हैं. अधिकतर यूरोपीय देशों में नौकरी छूटने के बाद लोग वृद्धावस्था पेंशन के ज़रिए सरकार पर निर्भर हो जाते हैं.

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