चार साल के बाद लौट रहे हैं सैनिक

  • 1 अगस्त 2010
Image caption नीदरलैंड के सैनिकों को अफ़गानिस्तान में सबसे प्रभावी माना गया.

अफ़गानिस्तान में लड़ रहे विदेशी सैनिकों में सबसे प्रभावी समझे जाने वाले नीदरलैंड के सैनिक रविवार को अपने देश वापस लौट रहे हैं.

दो हज़ार सैनिकों का ये दल चार साल बाद वापस लौट रहा है.

नेटो गठबंधन के अधिकारियों ने इसकी अहमियत को हल्के तौर पर दर्शाने की कोशिश की है लेकिन संवाददाताओं का कहना है कि गठबंधन के लिए ये एक नाज़ुक समय है क्योंकि हताहतों की संख्या बढ़ रही है और रणनीति को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं.

अफ़गानिस्तान में इस समय 80,000 अमरीकी सैनिक हैं और दूसरे देशों के सैनिकों की संख्या कुल मिलाकर 30,000 से कुछ ज़्यादा है.

कनाडा के सैनिक अगले साल लौट रहे हैं वहीं ब्रिटेन ने 2015 में अपने सैनिकों की वापसी का एलान किया है.

बीबीसी संवाददाता निक चाइल्ड्स का कहना है कि उरूज़गान प्रांत में तैनात नीदरलैंड के सैनिकों को सबसे प्रभावी माना जाता रहा है क्योंकि उन्होंने कुछ ऐसे तकनीक अपनाए जिसे नेटो गठबंधन के अन्य दस्तों के लिए एक मिसाल के तौर पर पेश किया गया.

Image caption नेटो गठबंधन इस वापसी को गौर से देख रहा है कि इसकी दूसरे सदस्य देशों पर क्या प्रतिक्रिया होती है.

नेटो ने नीदरलैंड की सरकार से अनुरोध किया था कि वो सेना की वापसी की तारीख़ आगे कर दें जिसके बाद वहां राजनीतिक विवाद उठ खड़ा हुआ और फ़रवरी में नीदरलैंड की गठबंधन सरकार के धराशायी होने की एक वजह बना.

नेटो अधिकारियों का कहना है कि गठबंधन सेना के दूसरे सदस्य देशों पर नीदरलैंड के सैनिकों की वापसी के एलान से कोई असर नही पड़ा है और किसी और ने सेना वापसी का एलान नहीं किया है.

लेकिन नेटो के अधिकारी नीदरलैंड की वापसी को काफ़ी गौर से देख रहे हैं कि इसकी क्या प्रतिक्रिया होती है और आने वाले महीनों में अफ़गान रणनीति पर इसका क्या असर होता है.

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