कीनिया में नए संविधान के लिए मतदान

  • 4 अगस्त 2010
कीनिया में नए संविधान के लिए जनमत संग्रह
Image caption नए संविधान को महत्वपूर्ण दस्तावेज़ कहा गया है

कीनिया में इस मुद्दे पर आज जनमत संग्रह हो रहा है कि देश को एक नया संविधान अपनाना चाहिए या नहीं. संविधान का जो मसौदा तैयार किया गया है उसमें देश के राजनीतिक ढाँचे में व्यापक सुधारों का प्रस्ताव रखा गया है.

अभी तक हुए सर्वेक्षणों में पता चलता है कि नए संविधान को जनमत संग्रह में स्वीकृति मिल जाएगी.

कीनिया के लोग आमतौर पर चुनावों के लेकर बहुत संवेदनशील हैं और वो चुनावों में कुछ घबरा जाते हैं.

अतीत में जो भी चुनाव हुए हैं उन सभी में आमतौर पर हिंसा हुई है लेकिन उनमें से कोई भी चुनाव इतना गंभीर नहीं रहा जितना कि ढाई साल पहले वाला चुनाव रहा.

उन चुनाव के नतीजों पर भी राजनीतिक दलों के बीच अच्छा ख़ासा विवाद हुआ था. उस लड़ाई में एक हज़ार से ज़्यादा लोग मारे गए थे और एक लाख से ज़्यादा लोग बेघर भी हुए थे.

इसीलिए बुधवार के जनमत संग्रह से पहले राष्ट्रपति म्वाई किबाकी ने ने राष्ट्रीय टेलीविज़न पर प्रकट होकर आम लोगों से भारी संख्या में मतदान करने की अपील करते हुए कहा, "हम शांतिपूर्ण मतदाने के लिए आगे आएँ. हमें जनमत संग्रह के बाद भी देश के नागरिकों को भाई और बहन समझना चाहिए."

राजनीतिक हल

नए संविधान में बहुत से ऐसे मुद्दों पर ध्यान दिया गया है जिनकी वजह से पिछले चुनावों के बाद हिंसा हुई थी. इसमें सत्ता बँटवारे का हल निकाला गया है, इसमें काउंटीज़ और सीनेट की एक नई प्रणाली सुझाई गई है और सबसे बढ़कर इसमें राजनीतिक सुधारों की बात की गई है.

संविधान का मसौदा तैयार करने वालों का कहना है कि ये दस्तावेज़ देश के एक शांतिपूर्ण भविष्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. जबकि इसके विरोधियों का कहना है कि इससे हालात और ख़राब ही होंगे.

नए संविधान की हिमायत करने वाले एक नेता अयांग न्योंगो ने पत्रकारों से कहा है कि जनमत संग्रह का परिणाम जो भी हो, ये राष्ट्रीय सुलह-सफ़ाई की एक प्रक्रिया का हिस्सा है.

उन्होंने कहा, "देश में एकता की ये भावना मज़बूत होना बहुत ज़रूरी है और ये मशीनी तरीक़े से नहीं किया जा सकता, बल्कि इसे देश के नागरिक ही करेंगे. इसके लिए राजनीतिक इंजीनियरिंग और राजनीतिक समाजीकरण की ज़रूरत है."

इस संवाददाता सम्मेलन में नए संविधान के समर्थकों और विरोधियों को एक साथ हिस्सा लेना था लेकिन विरोधियों ने हिस्सा नहीं लिया जिसे चिंता का विषय समझा जा रहा है.

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