लोकप्रियता बढ़ाने के लिए मना जन्मदिन

बराक ओबामा
Image caption जानकारों कह रहे है कि अगर आज चुनाव हों तो ओबामा नहीं जीतेंगे

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के सलाहकारों ने उनकी घटती लोकप्रियता का ग्राफ़ फिर से ऊपर पहुँचाने के लिए एक नया रास्ता निकाला और अमरीका के कई शहरों में बुधवार को ओबामा का जन्मदिन धूमधाम से मनाया गया.

माना जा रहा है कि डेमोक्रेटिक पार्टी के कार्यकर्ताओं की मदद से आयोजित किये गए ये कार्यक्रम राष्ट्रपति के सलाहकारों के ही सुझाव पर कराए गए.

नवम्बर में अमरीकी कांग्रेस के मध्यावधि चुनावों की तैयारी के लिए इन कार्यकर्ताओं में नया जोश भरना ज़रूरी है और ऐसे में ओबामा के सलाहकारों को लगा कि शीर्ष नेता के जन्मदिन का मौक़ा इसके लिए एक अच्छा अवसर साबित हो सकता है.

हार सकते हैं ओबामा

डेढ़ साल पहले ओबामा ने अमरीका के राष्ट्रपति का पद संभाला और उस समय उनकी लोकप्रियता आसमान छू रही थी. हालांकि जनवरी 2009 अब भूले हुए सपने जैसा महसूस होता है.

ये अरसा वाशिंगटन में एक बहुत लम्बा समय होता है और इस दौरान ओबामा की लोकप्रियता बहुत नीचे पहुँच गई है.

जानकारों का मानना है कि आज अगर राष्ट्रपति पद के लिए फिर से चुनाव कराए जाएं तो ओबामा बुरी तरह से हार सकते हैं.

राष्ट्रपति ओबामा का कहना है कि जिन बातों के लिए उनकी आलोचना की जा रही है वो वास्तव में उन्हें राष्ट्रपति बुश से विरासत में मिली हैं. उनकी इस दलील में दम हो सकता है लेकिन ये भी सच है कि चुनाव के दौरान उन्होंने जो वादे किए थे उनमें से अधिकतर पूरे नहीं हुए हैं.

जिन तर्कों के आधार पर उनकी आलोचना की जा रही है उनमें भी दम नज़र आता है. मैक्सिको की खाड़ी के मामले को ही लीजिए. ये मामला किसी भी तरह पूर्व राष्ट्रपति जार्ज बुश के कार्यकाल का नहीं है.

सबसे बड़ा संकट

कहा जाता है कि शुरू के कुछ हफ़्तों तक राष्ट्रपति ओबामा ने मेक्सिको की खाड़ी में तेल के रिसाव को गंभीरता से नहीं लिया. जबकि यह तेल रिसाव से पैदा हुआ इतिहास का सबसे बड़ा संकट था.

बाद में मामले का गंभीरता को देखते हुए उन्होंने इसके लिए ज़िम्मेदार कंपनी ब्रिटिश पेट्रोलियम को मुआवज़ा देने पर मजबूर किया और खाड़ी की सफ़ाई में तेज़ी लाने में कामयाब हुए.

यही वजह है कि अपने जन्मदिन के अवसर पर उन्होंने तेल रिसाव पर रोक लगाए जाने की जानकारी दी.

Image caption आरोप हैं कि ओबामा ने मैक्सिको खाड़ी में तेल रिसाव को शुरु में गंभीरता से नहीं लिया

राष्ट्रपति ओबामा ने कहा, “तेल के रिसने से होने वाले नुक़सान को रोकने का काम जारी रहेगा. हम प्रदूषण फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करते रहेंगे. हमें ये सुनिश्चित करना है कि जिन लोगों को नुकसान हुआ है उन्हें मुआवज़ा मिले. हम इस इलाके के लोगों के साथ तब तक रहेंगे जब तक वो दोबारा अपने पैरों पर खड़े नहीं हो जाते. ’’

ज़ाहिर है जितना ध्यान वो आजकल इस संकट पर दे रहे हैं वो अगर शुरू से देते तो उनकी लोकप्रियता घटती नहीं बल्कि कई गुना बढ़ती.

पिछले एक महीन से उनकी ‘अप्रूवल रेटिंग’ 47 फ़ीसदी पर अटकी है. यह विदेश मंत्री हिलरी क्लिंटन से भी कम है जिनकी लोकप्रियता 61 फ़ीसदी है.

ओबामा जब राष्ट्रपति पद पर आए तो अमरीका एक बड़े आर्थिक संकट के कगार पर था. उन्होंने कई बैंकों और निजी संस्थाओं को अरबों डॉलर की मदद दे कर उन्हें बंद होने से बचा लिया.

इसके बावजूद पिछले महीने समाचार चैनल सीएनएन के एक सर्वे के अनुसार उनकी आर्थिक नीति से केवल 42 फ़ीसदी लोग सहमत थे.

परिवर्तन की रफ़्तार

राष्ट्रपति ओबामा इस बात पर राहत महसूस कर सकते हैं कि जार्ज बुश को छोड़कर ज़्यादातर राष्ट्रपतियों की लोकप्रियता एक से डेढ़ साल में घटती रही है.

जानकार मानते हैं की ओबामा को जब प्रशासन की बागडोर मिली तब देश का बुरा हाल था.

अफ़ग़ानिस्तान और इराक़ के युद्ध ने अमरीकी अर्थव्यवस्था हिलाकर रख दिया था. दूसरा यह की जब वो चुन कर आए तो उनकी लोकप्रियता देखते हुए लोगों को उनसे उम्मीदें भी ज़्यादा थीं.

ऐसे में ओबामा ने अपने एक बयान में ख़ुद ही अपने प्रदर्शन को सही तरह से आंका जब हाल में उन्होंने कहा कि परिवर्तन जिस तेज़ी से आना चाहिए था नहीं आ सका है.

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