एक शिविर आतंकवाद के ख़िलाफ़

  • 8 अगस्त 2010
Image caption डॉ कादरी ने इसी साल लंदन में आतंकवाद के ख़िलाफ़ 600 पन्नों का फतवा जारी किया.

पश्चिमी देशों में गर्मियों में युवाओं के लिए लगने वाले कैंप आमतौर पर मौज-मस्ती और घुलने मिलने के लिए होते हैं.

लेकिन ब्रिटेन के वारिक यूनिवर्सिटी में इस सप्ताहांत एक समर कैंप लगा जिसे आतंकवाद के ख़िलाफ़ ब्रिटेन का पहला समर कैंप कहा जा रहा है.

इसमें शामिल होने भारी तादाद में मुसलमान युवा पहुंचे.

लेक्चर हॉल में बैठे कतार दर कतार मुसलमान युवक-युवती अपने नोटबुक पर शांति से नोट्स ले रहे थे.

भाषण दे रहे थे इस्लाम के विद्वान मोहम्मद ताहिर उल कादरी जिनके बोलने का अनूठा अंदाज़ लोगों का मन मोह लेता है और अपने भाषण को वो इंसानियत के लिए प्रेम का संदेश मानते हैं.

पाकिस्तान में पैदा हुए डॉ कादरी बेहद सरल लहज़े में अपनी बात कहते हैं और यूरोप और ब्रिटेन से आए युवाओं को प्रेम का अर्थ समझाने की कोशिश करते हैं.

वो कहते हैं कि प्रेम पवित्र होता है. उनका कहना है कुरान में जो अरबी शब्द प्रेम के लिए है वो बीज से जुड़ा हुआ है और जिस तरह से कोई पौधा बिना बीज के नहीं पनप सकता उसी तरह कोई भी पवित्र काम बिना प्रेम के नहीं पनप सकता.

कहते हैं, “ऐसी स्थिति में आतंकवाद जैसा नफ़रत फैलाने वाला काम अल्लाह को कैसे खुश कर सकता है ?”

डॉ कादरी का कहना है कि मुसलमानों में चरमपंथी और आतंकवादी अल्पमत में हैं लेकिन उनकी आवाज़ काफ़ी बुलंद है. वहीं जो लोग आतंकवाद और चरमपंथ के ख़िलाफ़ हैं उनकी संख्या कहीं ज़्यादा है लेकिन वो चुप रहते हैं.

डॉ कादरी ने इसी साल लंदन में आतंकवाद के ख़िलाफ़ 600 पन्नों का एक फतवा जारी किया है.

Image caption ब्रिटेन के मुसलमान युवाओं का एक वर्ग अबू हमज़ा जैसे कट्टरपंथी मौलवियों से ख़ासा प्रभावित है.

इस तरह के फतवे पहले भी जारी हुए हैं लेकिन उनके समर्थकों का कहना है कि इस फतवे में किसी तरह की ना नुकर नहीं है.

इस समर कैंप का उद्देश्य इसी फतवे को और मज़बूती देना है.

मैनचेस्टर की 18-वर्षीय ज़ाकिया यूसूफ़ कहती हैं कि आतंकवाद सही नहीं है लेकिन बहुत से लोगों के मन में दुविधा है कि क्या सही है और क्यों.

बर्मिंघम से आए ऐडम का कहना है कि अबू हमज़ा जैसे कट्टरपंथी मौलवियों के जोश से भरे भाषणों का अपने लोगों से दूर रह रहे युवा वर्ग पर ख़ासा असर पड़ता है.

उनका कहना है, “अबू हमज़ा जैसे लोग कुरान के किसी हिस्से से कुछ उठाकर कह देते हैं और आप उनके कहे में आ जाते हैं. इसलिए डॉ कादरी जैसे लोगों की ज़रूरत है जिससे आप सही ज्ञान अपने साथ ले जा सकें.”

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