चीन में भूस्खलन के बाद परेशानी

चीन
Image caption चीन में तेज़ बारिश और मिट्टी से सड़कें जाम हो गई हैं.

रविवार को हुए भूस्खलन के बाद चीन के उत्तरी भाग गांसु में हो रही तेज़ बारिश से राहत और बचाव कार्य में दिक्क़तें आ रही हैं. सड़क जाम होने से खाने-पीने की सामग्री प्रभावित लोगों तक नहीं पहुँच पा रही है.

तेज़ बारिश से भारी मात्रा में मिट्टी सड़कों पर बायलोंग नदी में गिर गई है जिससे नदी का जल स्तर तीन मीटर और ऊपर जा पहुँचा है.

सड़क जाम होने से प्रभावित इलाक़ों में ज़रूरत की सामग्री पहुँच नहीं पा रही है.

भविष्यवक्ताओं ने गुरुवार और शुक्रवार के लिए और भी तेज़ बारिश होने का अनुमान लगाया है.

ग़ौरतलब है, रविवार को उत्तर-पूर्वी चीन में हुए भूस्खलन से अब तक एक हज़ार से भी ज़्यादा लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है जबकि छह सौ से ज़्यादा लोग अभी भी लापता हैं.

जहाँ इस आपदा के शिकार हुए लोगों के ज़िंदा बचने की उम्मीदें दिन-ब-दिन कम होती जा रही हैं वहीं बचाव और राहत काम के दौरन बुधवार को दो लोगों को मलबे से ज़िंदा निकाला गया है.

बुधवार को ज़ूयोगू में तेज़ बारिश हुई है और भविष्यवक्ताओं ने अनुमान लगाया है कि शुक्रवार को 90 मिलीमीटर तक बारिश हो सकती है.

इस अनुमान के बाद वहाँ भूस्खलन होने की आशंकाएँ भी बढ़ गई हैं.

महामारी का ख़तरा

जाम हो चुकी बायलोंग नदी को खोलने के लिए सेना के जवान विस्फोटकों का इस्तेमाल कर रहे हैं.

बायलोंग नदी में भारी मात्रा में मलबा और मिट्टी गिरने से नदी जाम हो चुकी है. नदी का जल स्तर बढ़ने से मलबे और मिट्टी समेत रविवार को पानी ज़ूयोगू शहर में जा पहुँचा.

इस बीच महामारी से निपटने में प्रशिक्षित कर्मचारियों को प्रभावित इलाक़ों में भेज दिया है क्योंकि दूषित पानी से महामारी फैलने का डर बढ़ने लगा है.

जिन लोगों को बचा लिया गया है प्रशासन ने उनसे निवेदन किया है कि वो अपने रिश्तेदारों और क़रीबी लोगों की अंत्येष्टि कर दें.

ज़ूयोगू में डॉक्टर याँग लोंग ने चाइना डेली को बताया कि वो अभी तक कई वयस्कों और बच्चों का डायरिया का इलाज कर चुके हैं.

बीजिंग में बीबीसी संवाददाता माइकल ब्रिस्टो का कहना है कि चीन में हर साल भारी बारिश और बाढ़ आने की आशंका बनी रहती है. इसे देखते हुए केंद्र और राज्य सरकारों ने ऐसी किसी स्थिति से निपटने के लिए आपातकाल तरीक़े पहले से ही बनाए हुए हैं.

लेकिन पीने के लिए दूषित पानी और खाना बीमारियँ बढ़ा रहा है और इसलिए लोगों को और दवाईयों की ज़रूरत है.

उन्होंने कहा कि सरकार के सामने सबसे बड़ी समस्या है ज़रूरत की सभी सामग्रियाँ प्रभावित इलाक़ों तक पहुँचाना.

वहाँ मौजूद सभी पत्रकार ये भी बताते हैं कि प्रशासन के सामने एक और समस्या जो बढ़ती जा रही है वो ये है कि जिन लोगों को बचाया जा रहा है उन्हें कहाँ ठहराया जाए. इस बाढ़ से एक हज़ार घर या तो उजड़ गए हैं या तबाह हो गए हैं.

लगभग तीन हज़ार घर बाढ़ में बह गए हैं.

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