कौन हैं इमाम फ़ैसल अब्दुल रऊफ़?

इमाम फ़ैसल अब्दुल रऊफ़

न्यूयॉर्क में ग्राउंड ज़ीरो के पास बनने जा रहे इस्लामिक सांस्कृतिक केंद्र और मस्जिद की चर्चा पहले ही काफ़ी हो चुकी थी लेकिन अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने जब इस परियोजना का समर्थन किया तो चर्चा थोड़ी और गरमा गई.

इसके साथ ही एक बार फिर चर्चा में आ गए इमाम फ़ैसल अब्दुल रऊफ़.

वैसे तो इमाम फ़ैसल उस संस्था 'कोरडोबा इनिशिएटिव'के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं जो इस्लामिक सांस्कृतिक केंद्र और मस्जिद का निर्माण कर रहा है.

वे एक अमरीकी मुसलमान हैं जो 1983 से न्यूयॉर्क के मस्जिद अल-फ़राह के इमाम हैं. वे लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता हैं.

लेकिन यह उनका पूरा परिचय नहीं है.

न्यूज़वीक इंटरनेशनल के संपादक फ़रीद ज़कारिया ने उनके बारे में कहा है, "इस्लाम को लेकर इमाम फ़ैसल अब्दुल रऊफ़ का जो दृष्टिकोण है वह ओसामा बिन लादेन के लिए किसी दु:स्वप्न की तरह है."

इमाम फ़ैसल के बारे में यह टिप्पणी फ़रीद ज़कारिया ने एंटी डेफ़ेमेशन लीग (एडीएल) का पुरस्कार लौटाने की घोषणा करते हुए की थी. वे इस बात से नाराज़ थे कि एडीएल ने ग्राउंड ज़ीरो के पास मस्जिद बनाने का विरोध करते हुए कहा था कि इससे 9/11 के हादसे का शिकार हुए लोगों के परिजनों की भावनाएँ आहत होती हैं.

ज़कारिया ने इमाम फ़ैसल की किताब का एक हिस्सा उद्धृत करते हुए कहा कि वे मानते हैं,"अमरीका वास्तव में वैसा ही है जैसा कि किसी आदर्श इस्लामिक समाज को होना चाहिए. वह शांतिपूर्ण है, सहिष्णु है और बहुलतावादी है."

सुपरिचित लेखक विलियम डार्लिम्पल ने हाल ही में न्यूयॉर्क टाइम्स में अपने एक लेख में कहा है कि इमाम फ़ैसल अब्दुल रऊफ़ अमरीका के शीर्ष सूफ़ी विचारकों में से एक हैं.

समर्पित

वर्ष 1948 में क़ुवैत में जन्मे फ़ैसल अब्दुल रऊफ़ की शिक्षा इंग्लैंड, मिस्र, मलेशिया और अमरीका में हुई है.

उन्होंने न्यूयॉर्क के कोलंबिया यूनिवर्सिटी से विज्ञान स्नातक की डिग्री ली है और न्यूजर्सी के स्टीवन्स इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नॉलॉजी से 'प्लाज़्मा फ़िज़िक्स' में स्नातकोत्तर डिग्री ली है.

Image caption इस्लामिक केंद्र और मस्जिद निर्माण का खुला विरोध भी हो रहा है

1997 में उन्होंने अमरीकन सोसायटी फॉर मुस्लिम एडवान्समेंट (आस्मा) का गठन किया था. यह अमरीका की पहली मुस्लिम संस्था थी जिसका उद्देश्य अमरीकी मुसलमानों और ग़ैर मुसलमानों को विभिन्न कार्यक्रमों के ज़रिए नज़दीक लाना था.

इसके अलावा वे न्यूयॉर्क के इस्लामिक सेंटर के बोर्ड ऑफ़ ट्रस्टीज़ में हैं और न्यूयॉर्क के इंटरफ़ेथ सेंटर में सलाहकार के रूप में भी सेवाएँ देते हैं.

वर्ष 2003 में उन्होंने कोरडोबा इनिशिएटिव की स्थापना की.

उन्होंने तीन किताबें लिखी हैं जिसमें 'व्हाट्स राइट विद इस्लाम इज़ व्हाट्स राइट विथ अमरीका' ख़ासी चर्चित रही है.

संप्रदाय, राष्ट्रीयता और राजनीतिक भिन्नता वाले लोगों के बीच शांति और समझदारी बढ़ाने की वकालत करने वाले उनके प्रवचनों की वजह से वे वक्ता की तरह कई संस्थानों और आयोजनों में बुलाए जाते हैं.

ग्राउंड ज़ीरो यानी 9/11 के हमले का शिकार हुए वर्ल्ड ट्रेड सेंटर से कुल 12 ब्लॉक दूर इस्लामिक सांस्कृतिक केंद्र और मस्जिद बनाने की इस योजना को भी वे विभिन्न धर्म-संप्रदाय के लोगों को पास लाने के प्रयास के रुप में देखते हैं.

फ़रीद ज़कारिया कहते हैं कि यह मस्जिद अगर अमरीका से बाहर कहीं बन रही होती तो संभव है कि अमरीका इसके लिए आर्थिक सहायता दे रहा होता.

जबकि विलियम डार्लिम्पल कहते हैं कि अपनी उदार विचारधारा की वजह से इमाम फ़ैसल अल-क़ायदा और तालिबान का सहज निशाना हो सकते हैं.

विवाद और विरोध

लेकिन ऐसा नहीं है कि इमाम फ़ैसल अब्दुल रऊफ़ विवादों से परे हैं और लोग सिर्फ़ उनकी तारीफ़ करते हैं.

9/11 के हमलों के बाद आए उनके बयान ने और फ़लस्तीनी चरमपंथी संगठन हमास के बारे में उनके दृष्टिकोण से ख़ासा बवाल हो चुका है.

वे हमेशा कहते रहे हैं कि कट्टरपंथ और आतंकवाद की कोई जगह नहीं है. लेकिन 9/11 के हमले के बाद एक टेलीविज़न साक्षात्कार में उन्होंने कहा था, "मैं यह तो नहीं कहूँगा कि जो कुछ हुआ अमरीका उसका हक़दार था लेकिन जो कुछ हुआ उसमें अमरीका की नीति ने सहभागी की भूमिका निभाई." उन्होंने इसको समझाते हुए यह भी कहा था कि ओसामा बिन लादेन तो अमरीका की ही देन है.

इसी तरह एक रेडियो इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि अमरीकी विदेश विभाग हमास को एक चरमपंथी संगठन मानता है, क्या वे इससे सहमत है, तो उन्होंने साफ़ तौर पर कोई जवाब नहीं दिया था और कहा था, "मैं राजनेता नहीं हूँ इसलिए मैं मुद्दों को टालने की कोशिश करता हूँ. आतंकवाद एक जटिल सवाल है...मैं तो शांति की स्थापना करने वाला हूँ...मैं किसी को भी अपने आपको इस स्थिति में डालने की अनुमति नहीं दे सकता जहाँ दुनिया की कोई भी पार्टी मुझे विरोधी या दुश्मन की तरह देखे."

उनके इन बयानों से राजनीतिज्ञ पीटर टी किंग, रिक लैज़ियो और उपराष्ट्रपति पद की उम्मीदवार रहीं सारा पैलिन उनके ख़िलाफ़ खड़े हुए दिखे.

कुछ लोगों का आरोप है कि इमाम फ़ैसल अंग्रेज़ी में इस्लाम के बारे में कुछ और कहते हैं और अरबी में विरोधाभासी बातें कहते हैं.

लेकिन किसी भी सूफ़ी की तरह इमाम फ़ैसल अपने काम में रमे हुए हैं.

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