मध्यपूर्व विवाद पर होगी सीधी बातचीत

हिलरी क्लिंटन
Image caption हिलरी क्लिंटन ने दोनों पक्षों को सीधे बातचीत के लिए वाशिंगटन बुलाया है.

अमरीकी विदेश मंत्री हिलरी क्लिंटन ने कहा है कि इसराइल और फ़लस्तीनियों के बीच दो सितंबर से सीधी बातचीत की शुरुआत होगी.

अमरीकी विदेश मंत्री का कहना था कि इस बातचीत के लिए इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू और फ़लस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास को वॉशिंगटन आने का न्योता दिया गया है.

हिलरी क्लिंटन के मुताबिक ये बातचीत एक साल में पूरी की जा सकती है.

दोनों नेताओं ने भी 20 महीने बाद शुरू होने वाली इस बातचीत के लिए एक साल की समय सीमा तय किए जाने पर रज़ामंदी दे दी है.

लेकिन संवाददाताओं का कहना है कि दोनों पक्षों के बीच मुख्य मुद्दों पर गंभीर मतभेदों को देखते हुए इस बातचीत से किसी व्यापक समझौते की आशा कम ही है.

इन नाज़ुक मुद्दों में क़ब्ज़े वाले इलाक़ों में यहूदी बस्तियों का निर्माण, येरुशलम का दर्जा, भावी फ़लस्तीनी राष्ट्र की सीमाएं और वापसी का अधिकार, कुछ ऐसे गंभीर मुद्दे हैं जिन पर समझौता होना आसान नहीं दिखता.

हिलरी क्लिंटन का कहना था, "ये बातचीत बिना शर्त और आपसी विश्वास पर आधारित होनी चाहिए. सफलता की प्रतिबद्धता के साथ क्षेत्र के लोगों के बेहतर भविष्य के लिए ये बातचीत होनी चाहिए."

मिस्र और जौर्डन के नेताओं को भी इस बातचीत में शामिल होने का न्योता दिया गया है.

मध्यपूर्व मामलों के अमरीकी दूत जॉर्ज मिचैल ने कहा है कि दोनों पक्षों के बीच सीधे बातचीत से ही दो राष्ट्र के लक्ष्य तक पहुंचा जा सकता है.

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