कूड़ेदान में फेंके जा रहे नवजात

बच्चा
Image caption 12 महीने तक का बच्चा 'शिशु' कहलाता है

मलेशिया की सरकार ने शिशुओं के परित्याग कर दिए जाने की लगातार बढ़ती घटनाओं पर चिंता ज़ाहिर की है.

वहां की राजनीतिक पार्टियां और ग़ैर सरकारी संस्थाएं इस समस्या से निपटने के लिए एक बैठक कर रही हैं.

मलेशिया में सिर्फ़ इस साल अबतक 65 ऐसे शिशु मिले हैं जिन्हें संभवत उनके मां बाप ने त्याग दिया था.

इनमें से कुछ तो ऐसे बच्चे थे जो जब मिले तबतक उनकी मौत भी हो चुकी थी.

इन शिशुओं को या तो कूड़ेदान में पाया जाता है या फिर गलियों में यूं ही सड़क किनारे.

कुछ मामलों में तो ये किसी घर के बाहर दरवाज़ों पर छोड़ दिए जाते हैं.

अब मलेशिया की सरकार ऐसे अपराध के लिए दी जानेवाली सज़ा बढ़ा रही है.

Image caption माना जा रहा है कि परित्यक्त नवजात शिशु नाजायज़ संतान होती हैं

सरकार चाहती है कि इस अपराध को हत्या या हत्या की कोशिश माना जाए और दोषियों को सख़्त से सख़्त सज़ा दी जाए.

मलेशिया में लोगों का मानना है कि जिन शिशुओं को बेसहारा छोड़ कर दिया जाता है वो संभवत: विवाह से पहले की संतानें होती हैं.

मलेशिया में कुछ संस्थाएं ऐसी हैं जो ये मानती हैं कि ये युवावर्ग के आज़ाद हो रहे ख्यालों का अंजाम है.

मलेशिया की विपक्षी इस्लामी पार्टी (पीएएस) ने सलाह दी है कि इन घटनाओं से निपटने के लिए इस्लामी क़ानून का सहारा लिया जाए और दोषियों को इसी क़ानून के तहत सज़ा मिले.

मलेशिया एक मुस्लिम बहुल धर्मनिरपेक्ष देश है.

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