वार्ता का दोनो पक्षों ने स्वागत किया

पश्चिमी तट का इलाक़ा
Image caption दोनों पक्षों के बीच विवाद के कई गंभीर मुद्दे हैं

फ़लस्तीनी और इसराइली नेताओं ने अगले महीने से सीधी शांतिवार्ता फिर से शुरु करने के लिए अमरीकी पहल का स्वागत किया है.

दोनों पक्षों ने दो सितंबर से वॉशिंगटन में होने वाली इस वार्ता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता ज़ाहिर की है.

इसराइली प्रवक्ता मार्क रेगेव ने कहा है कि वार्ता कठिन होगी लेकिन इसमें ऐतिहासिक समझौते की संभावना है.

जबकि प्रमुख फ़लस्तीनी वार्ताकार साएब एरेकात ने कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि दोनों पक्ष शांति स्थापना के लिए अच्छे साझेदार साबित होंगे.

लेकिन यरुशलम में बीबीसी संवादताता वाइर डेविस का कहना है कि दोनों क्षेत्रों के लोगों को इस वार्ता की सफलता को लेकर बहुत उम्मीद नहीं है और अभी बहुत सी बाधाओं को पार करना है.

उनका कहना है कि मुख्य बाधाओं में यरुशलम की राजनीतिक स्थिति और फ़लस्तीनी राष्ट्र की सीमाओं का विवाद होगा.

वार्ता

अमरीका ने ज़ोर लगाकर दोनों पक्षों को इस बिंदु तक पहुँचाया है, जब वे वार्ता के लिए तैयार हो गए हैं.

अब इसराइल की ओर से कहा गया है कि वे लंबे समय से कह रहे थे कि फ़लस्तीनियों को गंभीर और व्यापक स्तर पर वार्ता करनी चाहिए.

दूसरी ओर फ़लस्तीनियों ने उम्मीद जताई है कि वार्ता किसी निर्णय पर पहुँचाने वाली होगी.

लेकिन फ़लस्तीनी और इसराइली दोनों पक्ष के लोगों में इस वार्ता को लेकर बहुत संशय हैं क्योंकि पिछले 20 वर्षों में कई वार्ताएं विफल हो चुकी हैं.

राजनीतिक विश्लेषकों और आम लोगों का कहना है कि कई बाधाओं को पार करना होगा और यदि वार्ता सफल होती है तो दोनों पक्षों को कई समझौते करने होंगे.

सहमति

इससे पहले अमरीकी विदेश मंत्री हिलरी क्लिंटन ने कहा था कि इसराइली और फ़लस्तीनियों के बीच दो सितंबर से सीधे बातचीत की शुरुआत होगी.

उनका कहना था कि इस बातचीत के लिए इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू और फ़लस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास को वॉशिंगटन आने का न्योता दिया गया है.

उन्होंने कहा था कि यह बातचीत एक साल में पूरी की जा सकती है.

दोनों नेताओं ने भी 20 महीने बाद शुरू होने वाली इस बातचीत के लिए एक साल की समय सीमा तय किए जाने पर रज़ामंदी दे दी है.

मिस्र और जॉर्डन के नेताओं को भी इस बातचीत में शामिल होने का न्योता दिया गया है.

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