कांगो में जनसंहार हुआ: यूएन रिपोर्ट

हूतू शरणार्थी
Image caption विद्रोहियों ने हूतू शरणार्थियों पर बड़ी संख्या में लगातार हमले किए

संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में कांगों युद्ध के दौरान हूतू शरणार्थियों के ख़िलाफ़ किए गए अपराधों को जनसंहार माना गया है.

वर्ष 1993 से 2003 के बीच रवांडा की सेना और कांगों के विद्रोहियों ने हूतू शरणार्थियों पर बड़ी संख्या में लगातार हमले किए.

कई जगहों पर पहचान परेड के ज़रिए हूतू मूल के लोगों को भीड़ से अलग कर उनकी हत्या की गई. इनमें बड़ी संख्या में महिलाएं, बुज़ुर्ग, बीमार और बच्चे भी शामिल थे.

ये रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र के एक जांच समूह ने तैयार की है.

बीबीसी को मिली इस रिपोर्ट की एक कॉपी में जांचकर्ताओं ने मानवाधिकार हनन के कई मामलों का हवाला दिया है. डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ़ कांगों में हुए इस युद्ध को अक्सर ‘अफ्रीकी विश्व युद्ध’ की संज्ञा दी जाती है.

रिपोर्ट में इस तरह की कई सौ घटनाओं का उल्लेख है जिनमें अफ्रीकी सुरक्षाबलों ने शरणार्थियों के साथ आमानवीय बर्ताव किया. जांचकर्ताओं ने इन अपराधों को जनसंहार माना है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि हज़ारों की संख्या में हूतू मूल के लोगों की इन हत्याओं पर अंतिम फ़ैसला न्यायालय के हाथ में ही होगा. यह रिपोर्ट अगले कुछ दिनों में सार्वजनिक की जाएगी.

कांगों युद्ध के दौरान बड़ी संख्या में हूतू शरणार्थियों ने रवांडा में हिंसा के दौरान अलग-अलग जगहों पर शरण ली थी.

रिपोर्ट कहती है कि कांगों के विद्रोही समूह ‘एएफडीएल’ ने शरणार्थियों की हत्या के लिए हथौड़ों का भी इस्तेमाल किया.

हालांकि रवांडा की सरकार ने इस तरह की घटनाओं से इनकार किया है. रवांडा के कानून मंत्री थारसीज़े कारागुरामा ने बीबीसी से कहा कि ये रिपोर्ट ग़लत है और आरोप अभी साबित नहीं हुए हैं.

संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि वो रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद ही इस पर कोई टिप्पणी करेगा.

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