आंध्र में क्षेत्रीय तनाव

छात्र
Image caption छात्रों का कहना था कि उन्हें जानबूझ कर फ़ेल किया जाता है

हैदराबाद के उस्मानिया विश्वविद्यालय के छात्रों द्वारा आंध्र क्षेत्र के अध्यापकों की पिटाई के साथ ही राज्य क्षेत्रीय तनाव में घिर गया.

यह अध्यापक बी.एड के जवाबी पन्नों की जांच के लिए उस्मानिया विश्वविद्यालय आये थे.

यह छात्र मांग कर रहे थे कि उनके जवाबी पन्नों की जांच केवल तेलंगाना के अध्यापकों ही से करवाई जाए, क्योंकि आंध्र के अध्यापक उन के साथ अन्याय करते हैं और उन्हें जान बूझ कर फ़ेल करते हैं.

उस्मानिया विश्वविद्यालय के छात्रों की संयुक्त कार्य समिति के कार्यकर्ताओं ने पहले तो उस जगह धरना दिया, जहां जवाबी पन्ने जांचे जा रहे थे.

उसके बाद छात्रों ने अंदर घुस कर अध्यापकों को काम करने से रोक दिया और जब वह बाहर निकले तो उन पर हमला कर दिया और उनकी पिटाई कर दी.

इस हमले के दौरान अध्यापकों को अपनी जान बचाने के लिए वहां से भागना पड़ा.

इस घटना के बाद राज्य भर में तनाव फैल गया.

घटना की जांच

राज्यपाल ई एस एल नरसिंहम ने उस्मानिया विश्वविद्यालय के अधिकारियों से इस घटना की रिपोर्ट मांगी.

इस घटना की प्रतिक्रया में विशाखापत्तनम की आंध्र विश्वविद्यालय में विजयवाड़ा एंड तिरुपति सहित कई दूसरे नगरों में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किए, जुलूस निकाले. और घटना के लिए तेलंगाना राष्ट्र समिति के अध्यक्ष के. चंद्रशेखर राव को जिम्मेवार ठहराते हुए उनके पुतले जलाए.

आंध्र प्रदेश को एकजुट रखने की समर्थक आंध्र संयुक्त कार्य समिति ने इस घटना के विरुद्ध आंदोलन चलाने का फैसला किया है.

लेकिन उस्मानिया विश्वविद्यालय में संयुक्त कार्य समित के एक नेता रमेश ने कहा कि "छात्र शांति पूर्ण ढंग से धरना दे रहे थे, लेकिन आंध्र के अध्यापकों ने भड़काऊ बातें कह कर हालात को बिगाड़ा."

उन्होंने चेतावनी दी, कि आगामी दो दिन में बाहर के तमाम अध्यापकों को वापस नहीं भिजवाया गया, तो आंदोलन और भी तेज़ कर दिया जाएगा.

उन्होंने कहा कि गत वर्ष बी. एड की परीक्षा में केवल चालीस प्रतिशत छात्र पास हो सके, और बाकी को फ़ेल कर दिया गया.

उन का कहना था कि आंध्र के छात्र नहीं चाहते कि तेलंगाना के बच्चे पास हों और उन्हें नौकरियां मिलें.

इधर आंध्र में अध्यापकों और छात्रों के संगठनों ने उस्मानिया विश्वविद्यालय के छात्रों के विरुद्ध आपराधिक मामले दर्ज करने और उन्हें गिरफ़्तार करने की मांग की है.

राजनीतिकरण

इस घटना को लेकर राजनेताओं के बीच भी तू-तू मैं-मैं शुरू हो गई है.

तेलंगाना से संबंध रखने वाली सांसद पूनम प्रभाकर ने कहा कि इन घटनाओं के लिए विश्वविद्यालय के अधिकारी जिम्मेदार हैं.

जिन्होंने छात्रों के विरोध के बावजूद दूसरे क्षेत्र के अध्यापकों से जवाबी पन्नों की जांच करने की कोशिश की.

आंध्र से संबंध रखने वाले तेलुगुदेसम के नेता चन्द्रमोहन रेड्डी ने अध्यापकों पर हमले की निंदा करते हुए कहा, कि इसके लिए चंद्रशेखर राव जिम्मेदार हैं.

इधर ख़ुद चंद्रशेखर राव ने यह कहकर नया विवाद खड़ा कर दिया है कि राज्य में ग्रुप 1 की नौकरियों के लिए राज्य के जनसेवा आयोग की परीक्षाएं रद्द कर दी जाए, और यह स्पष्ट किया जाए, कि इनमें से कितने प्रतिशत नौकरियां तेलंगाना वालों को मिलेंगी.

उन्होंने कहा कि अगर सरकार यह परीक्षाएं करवाती है, तो इस के गंभीर परिणाम निकलेंगे.

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