मध्य पूर्व वार्ता में अहम मुलाक़ातें

  • 1 सितंबर 2010
बराक ओबामा और बिन्यामिन नेतान्याहू

अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा मध्य पूर्व शांति वार्ता के तहत इसराइली और फ़लस्तीनी नेताओं की गुरूवार को प्रस्तावित रूबरू मुलाक़ात से पहले अलग-अलग मुलाक़ातें कर रहे हैं.

पिछले दो वर्षों में यह पहला मौक़ा है जब इसराइली और फ़लस्तीनी नेताओं के बीच गुरूवार को सीधी बातचीत होनी है और इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतान्याहू और फ़लस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास लगभग एक वर्ष बाद सीधे मुलाक़ात करेंगे.

उससे पहले राष्ट्रपति बराक ओबामा इसराइली प्रधानमंत्री और फ़लस्तीनी राष्ट्रपति से वाशिंगटन में मुलाक़ात कर रहे हैं.

इन नेताओं से मुलाक़ात के बाद बराक ओबामा मिस्र और जॉर्डन के नेताओं से भी मुलाक़ात करेंगे.

अमरीका की कोशिश है कि इस बातचीत में इसराइल और फ़लस्तीनियों के बीच प्रमुख मुद्दों पर कोई बढ़त हो जिनमें येरूशलम पर दावों का विवाद, पश्चिमी तट में यहूदी बस्तियों का वजूद और भविष्य में बनने वाले फ़लस्तीनी राष्ट्र की सीमाओं के मुद्दे शामिल हैं.

सुरक्षा भी एक प्रमुख मुद्दा है. इसराइल की माँग है कि फ़लस्तीनी राष्ट्र से इसराइली सेनाएँ हट तो जाएंगी लेकिन वो पूर्वी सीमा पर तैनात रहनी चाहिए.

फ़लस्तीनी प्राधिकरण के राष्ट्रपति महमूद अब्बास फ़तह पार्टी और हमास के बीच संघर्ष की वजह से कुछ कमज़ोर हैं. ग़ाज़ा पट्टी पर शासन करने वाला हमास बातचीत का विरोध कर रहा है क्योंकि उसे बातचीत से बाहर रखा गया है.

दोनों पक्ष सीधी बातचीत के लिए एक साल तक प्रयास करने पर सहमत हुए हैं लेकिन संवाददाताओं का कहना है कि इस बातचीत से कोई ठोस नतीजा निकलने की संभावना बहुत कम है क्योंकि प्रमुख मुद्दों पर गहरे मतभेद बरक़रार हैं.

असर नहीं

उधर इसराइली और फ़लस्तीनी नेताओं ने कहा है कि पश्चिमी तट में यहूदी बस्तियों पर हमास के एक हमले में चार यहूदियों की मौत का शांति वार्ता पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

पश्चिमी तट में यहूदी बस्तियों पर मंगलवार को हमास के एक हमले में चार यहूदियों की मौत हो गई थी.

Image caption हत्याओं के बाद सुरक्षा प्रबंध कड़े कर दिए गए

फ़लस्तीनी प्राधिकरण ने हमास के ख़िलाफ़ एक बड़ा अभियान चलाया है और अनेक गिरफ़्तारियाँ की गई हैं.

फ़लस्तीनी क्षेत्र पश्चिमी तट में बनी यहूदी में रहने वालों ने इस घटना का बदला लेने का आहवान किया है लेकिन प्रधानमंत्री नेतान्याहू ने संयम बरतने की अपील की है.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने इन हत्याओं की निंदा करते हुए इन्हें मध्य पूर्व शांति वार्ता में बाधा डालने की एक घृणास्पद कोशिश क़रार दिया है.

बीती रात फ़लस्तीनी सुरक्षा बलों ने एक बड़ा अभियान चलाकर हमास के अनेक सदस्यों को गिरफ़्तार किया.

उधर इसराइली सुरक्षा बलों ने अधिकृत पश्चिमी तट क्षेत्र के अनेक हिस्सों की घेराबंदी कर दी है और हेब्रॉन के निकट स्थित गाँवों की तलाशी ली गई है.

हमास के एक वरिष्ठ पदाधिकारी उमर अब्दुल रज़ाक ने कहा है कि बुधवार को दोपहर तक 250 सदस्यों को गिरफ़्तार किया गया था. उन्होंने गिरफ़्तारियों को देशद्रोही कार्रवाई क़रार दिया.

फ़लस्तीनी प्रधानमंत्री सलाम फ़ैय्याद ने इस तरह के हमले फिर से नहीं होने देने का संकल्प व्यक्त किया है.

हमास के एक प्रवक्ता समी अबू ज़ुहरी ने इससे पहले कहा था कि ये हमले फ़लस्तीनी क्षेत्रों के इसराइली अधिग्रहण का स्वभाविक जवाब हैं.

फ़लस्तीनी क्षेत्रों में यहूदी बस्तियों में रहने वाले यहूदियों के एक संगठन येशा काउंसिल ने कहा है कि वो इन हमलों के विरोध स्वरूप निर्माण कार्य शुरू करेगा.

ग़ौरतलब है कि इसराइल सरकार ने पश्चिमी तट में यहूदी बस्तियों के निर्माण पर फिलहाल रोक घोषित कर रखी है.

इसराइली प्रधानमंत्री कह चुके हैं कि फ़लस्तीनी क्षेत्रों में यहूदी बस्तियों के नए निर्माण पर लगी इस रोक को आगे बढ़ाने की फिलहाल कोई योजना नहीं है.

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