तालिबान से बातचीत के लिए समिति

करज़ई
Image caption हामिद करज़ई को उम्मीद है कि तालेबान के साथ शांति वार्ता की ये कोशिश कारगर होगी

अफ़गानिस्तान के राष्ट्रपति कार्यालय ने बताया है कि तालिबान के साथ शांति वार्ता शुरू करने के लिए राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने एक समिति का गठन किया है.

इसी साल जून में अफ़ग़ानिस्तान में क़बायली नेताओं के संगठन जिरगा ने राष्ट्रपति हामिद करज़ई के तालिबान से शांति समझौते के प्रयासों का समर्थन किया था.

तालिबान को 2001 में अफ़ग़ानिस्तान की सत्ता से बेदख़ल कर दिया गया था और तब से वो अमरीका के समर्थनवाली सरकार और विदेशी सैनिकों को हटाने के लिए लड़ाई लड़ रहा है.

उनसे बातचीत के प्रयास के लिए समिति गठित किए जाने को राष्ट्रपति कार्यालय ने एक महत्वपूर्ण क़दम बताया है.

माना जा रहा है कि इस समिति में 50 सदस्य होंगे जिसमें कुछ पुराने तालिबान विद्रोहियों के अलावा महिलाओं, विपक्षी सदस्यों और समाज के कुछ विशिष्ट व्यक्तियों को भी शामिल किया जा सकता है.

समिति के सदस्यों की घोषणा अगले हफ़्ते ईद की छुट्टियों के बाद की जाएगी.

नाकाम कोशिशें

इससे पहले तालिबान से बातचीत के लिए किए गए सभी प्रयास विफल रहे हैं.

इसका मुख्य कारण ये भी है कि तालिबान इस पर ज़ोर देते रहे हैं कि पहले विदेशी सेनाएँ देश छोड़कर वापस जाएँ.

अफ़गानिस्तान में इस वक़्त लगभग डेढ़ लाख विदेशी सैनिक तैनात हैं और हाल में अमरीका ने वहाँ 30 हज़ार अतिरिक्त सैनिक भेजकर अपने आपको और सशक्त किया है.

इससे पहले अमरीका ने उन कोशिशों का समर्थन किया था जिसके तहत उन तालिबान लड़कों को राजनीति की मुख्यधारा में लाने की बात की गई थी जो हिंसा का रास्ता छोड़ने को तैयार थे.

लेकिन तालिबान के ख़िलाफ़ हाल के दिनों में लड़ाई और तेज़ हुई है.

अफ़गानिस्तान में अमरीकी और नेटो सेना के कमांडर जेनरल डेविड पेट्रास ने हाल ही में कहा था कि अफ़गानिस्तान के कुछ हिस्सों में वो तालिबान के बल को कम कर पाने में सफल हुए हैं.

उन्होंने ये भी कहा कि जैसे जैसे सेनाएँ तालिबान के मुख्य गढ़ों को तोड़ने के लिए आगे बढ़ेंगी, लड़ाई और मुश्किल होती जाएगी.

अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अफ़गानिस्तान से अमरीकी सैनिकों की वापसी की शुरुआत की तारीख़ जुलाई, 2011 तय की है.

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