फिर आना पड़ा अमरीकियों को

Image caption इसी छावनी पर तीन हफ़्ते पहले भी हमला हुआ था.

इराक़ में लड़ाकू अभियान से हटने के एलान के चंद दिनों बाद ही अमरीकी सेना को इराक़ी सैनिकों की मदद के लिए आना पड़ा.

अमरीका ने इस ख़बर की पुष्टि की है कि बग़दाद में एक सैनिक छावनी पर हुए हमले को नाकाम करने के लिए उन्हें कार्रवाई करनी पड़ी.

सैनिक छावनी पर हुए इस हमले में कम से कम 12 लोग मारे गए और 20 से ज़्यादा घायल हो गए.

अनुमान है कि कम से कम पांच आत्मघाती हमलावरों ने एक साथ इस छावनी पर धावा बोला था.

अमरीकी सेना के प्रवक्ता का कहना है कि उन्हें इराक़ी सेना के बचाव में गोलीबारी करनी पड़ी जब दो आत्मघाती हमलावर छावनी के अंदर घुस आए..

उनका कहना था कि इराक़ियों ने अमरीकी हेलीकॉप्टरों, ड्रोन और विस्फोटकों के जानकारों की भी मदद मांगी.

इराक़ी सेना ने अंतत: दोनों चरमपंथियों को मार गिराया.

अपने दम पर?

इराक़ी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता का कहना है कि उनके सैनिकों ने अपने दम पर ही इस अभियान को अंजाम दिया.

लेकिन बीबीसी संवाददाता से बात करते हुए एक अन्य इराक़ी सैन्य अधिकारी का कहना था कि अमरीकियों को मदद के लिए बुलाया गया था और जब उन्होंने हमलावरों पर गोलीबारी शुरू की तभी इराक़ी सैनिक इमारत के अंदर घुस पाए.

तीन हफ़्ते पहले अल क़ायदा ने इसी छावनी को निशाना बनाया था जिसमें इराक़ी सेना में भर्ती होने आए पचास से ज़्यादा युवक मारे गए थे.

एक हफ़्ते पहले ही राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इराक़ में अमरीकी लड़ाकू अभियान के ख़त्म होने की घोषणा की थी.

साथ ही उन्होंने कहा था कि अगले साल के अंत तक अमरीकी सेना की बची हुई टुकड़ियां भी वापस लौट आएंगी.