'बलात्कार रोकने में नाकाम रहे'

कांगो में रोती महिला
Image caption पिछले दो महीनों में कांगो गणराज्य में 500 से भी ज़्यादा महिलाओं का सामूहिक बलात्कार हो चुका है.

संयुक्त राष्ट्र के वरिष्ठ अधिकारी ने माना है कि कांगो गणराज्य में 500 से भी ज़्यादा महिलाओं के सामूहिक बलात्कार को रोकने में संयुक्त राष्ट्र नाकाम रहा.

उनका कहना था कि शांति सैनिकों की कार्रवाई की रफ़्तार धीमी थी.

संयुक्त राष्ट्र शांतिसेना के उप-प्रमुख अतुल खरे ने सुरक्षा परिषद से कहा है कि वो सामूहिक बलात्कार के लिए ज़िम्मेदार बाग़ी नेताओं पर प्रतिबंध लगाए.

अतुल खरे ने पीड़ितों की सुरक्षा करने में विफल होने की आंशिक ज़िम्मेदारी ली.

उन्होंने कहा कि पिछले दो महीनों में 500 से ज़्यादा महिलाओं का बलात्कार पूर्वी कांगो के हथियारबंद गिरोह ने किया है.

कांगो के पूरे पूर्वी हिस्से में बलात्कार हुए लेकिन संयुक्त राष्ट्र के अधिकारी ने ख़ासतौर पर इस बात की जांच की कि जहां बलात्कार हुए वो जगह शांतिसैनिकों की छावनी के बेहद नज़दीक थी फिर भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई.

उन्होंने सुरक्षा परिषद को बताया, "हालांकि सेना काफ़ी मुश्किल परिस्थितियों में रहती है लेकिन इस मामले में वो पीड़ितों की रक्षा करने में नाकाम रही है."

बेहतरी की ओर क़दम

अतुल खरे ने कहा कि अब शांतिसैनिक इलाक़े में निगरानी बढ़ाएंगे और स्थानीय निवासियों के साथ अपना संपर्क बेहतर बनाएंगे.

लेकिन उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि इन हमलों के पीछे जिन बाग़ी नेताओं का हाथ है परिषद उनपर प्रतिबंध लगाए.

कांगो के पूर्वी भाग में क़ानून व्यवस्था न होने के कारण वहां यौन हिंसा एक समस्या बन चुकी है. वहां बंदूक से लैस लोगों का गिरोह गांववासियों पर हमला कर देता है. पिछले साल 15,000 से भी ज़्यादा बलात्कार की घटनाएं हुई थीं.

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने माना है कि शांतिसैनिकों को किसी घटना पर फुर्ती से कार्रवाई करनी होगी. परिषद ने सरकार से कहा कि वो दोषियों को सज़ा दे और ऐसे अपराध करने वालों को बचकर न जाने दे.

संबंधित समाचार