पादरी क़ुरान जलाने की योजना पर क़ायम

  • 9 सितंबर 2010
काबुल में विरोध प्रदर्शन
Image caption अफ़ग़ानिस्तान में पादरी टेरी जोन्स का पुतला जलाकर विरोध करते लोग

शनिवार को क़ुरान की प्रतियाँ जलाने की घोषणा करने वाले अमरीकी पादरी ने कहा है कि वे अपनी योजना से पीछे नहीं हट रहे हैं.

उनका कहना है कि यह 'आतंकवाद' के ख़िलाफ़ खड़े होने का तरीक़ा है.

फ़्लोरिडा के एक छोटे चर्च के पादरी टेरी जोन्स का कहना है कि वे क़ुरान की प्रतियाँ जलाकर ग्यारह सितंबर को अमरीका पर अल-क़ायदा के चरमपंथी हमले की नौवीं बरसी मनाना चाहते हैं.

उनकी इस योजना पर मुस्लिम देशों के नाराज़गी ज़ाहिर की है. नैटो और अफ़ग़ानिस्तान में शीर्ष अमरीकी कमांडर ने भी इसका विरोध किया है.

अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने इसे 'अशोभनीय' बताया है.

'नया ढंग'

सोमवार को अफ़ग़ानिस्तान में शीर्ष अमरीकी कमांडर जनरल डेविड पेट्रियस ने कहा था कि यदि अपनी योजना पर अमल करता है तो इससे उनके सैनिकों की जान को ख़तरा हो सकता है.

जबकि अमरीकी एटॉर्नी जनरल एरिक होल्डर ने इस योजना को 'मूर्खतापूर्ण और ख़तरनाक' बताया है.

लेकिन इसके आयोजन पादरी टेरी जोन्स ने बुधवार को कहा है कि क़ुरान जलाने की इस योजना का उद्देश्य उनके इस विचार की ध्यान आकृष्ट करना है कि 'कुछ गड़बड़' है.

अपने चर्च के बाहर पत्रकारों से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा, "अब शायद वह समय आ गया है जब हम खड़े होकर नए ढंग से आतंकवाद का मुक़ाबला करें."

उन्होंने स्वीकार किया कि उन्हें जनरल पेट्रियस की चिंता की जानकारी है लेकिन उन्होंने दावा किया है कि स्पेशल फ़ोर्स के एक अधिकारी ने उनसे संपर्क करके कहा है कि अमरीकी सैनिक उनकी इस योजना के साथ हैं.

उनका कहना था, "इसलिए हम 11 सितंबर की अपनी योजना पर क़ायम है."

मोहम्मद मुसरी फ़्लोरिडा में इस्लामिक सोसायटी के प्रमुख हैं. जब पादरी टेरी जोन्स अपनी बात रख रहे थे तो वहीं मौजूद थे और इसके बाद वे उनके साथ चर्चा के लिए चर्च के भीतर चले गए.

बाद में मोहम्मद मुसरी ने पत्रकारों को बताया कि उन्होंने पादरी जोन्स को बाइबिल की पंक्तियाँ सुनाई हैं और कहा है कि वे क़ुरान जलाने की अपनी योजना को रद्द कर दें.

उन्होंने कहा, "मैं विश्वास करता हूँ कि आख़िर में वे सही क़दम उठाएँगे और अपनी इस योजना को रद्द करेंगे."

अमरीका की मुश्किल

Image caption टेरी जोन्स की योजना से ओबामा प्रशासन की मुसीबतें बढ़ सकती हैं

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब अमरीका और इस्लाम के बीच संबंध कठिन दौर से गुज़र रहे हैं.

इस समय देश में इस बात पर तेज़ बहस चल रही है कि न्यूयॉर्क में 9/11 के हमले वाली जगह ग्राउंड ज़ीरो से कुछ दूरी पर मस्जिद बनाने की इजाज़त देनी चाहिए या नहीं.

क़ुरान जलाने की इस योजना पर वेटिकन, ओबामा प्रशासन और नैटो ने भी इस पर चिंता ज़ाहिर की है.

बीबीसी के कूटनीतिक मामलों के संवाददाता जोनाथन मार्कस का कहना है कि अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अपनी नीतियों के ज़रिए मुस्लिम देशों के बीच अमरीका की छवि को सुधारने की कोशिश की है.

'डव वर्ल्ड आउटरीच सेंटर’ की इस घोषणा से ओबामा की कोशिशों पर पानी फिर सकता है.

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