क़ुरान जलाने की योजना 'स्थगित'

टेरी जोन्स

शनिवार, 11 सितंबर को क़ुरान की प्रतियाँ जलाने वाले अमरीकी पादरी ने कहा है कि उनकी योजना रद्द नहीं हुई है बल्कि स्थगित हुई है.

पहले उन्होंने अपनी योजना रद्द करने की घोषणा कर दी थी.

पादरी टेरी जोन्स के प्रवक्ता ने कहा है कि वे (पादरी) महसूस करते हैं कि एक इमाम ने उनसे झूठी बात कही जिसकी वजह से उन्होंने योजना रद्द करने की घोषणा कर दी थी.

तस्वीरें: क़ुरान की प्रतियाँ जलाने की धमकी और बवाल

इससे पहले पादरी जोन्स ने एक प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए कहा था कि इमाम मोहम्मद मुसरी ने उनसे कहा है कि न्यूयॉर्क में ग्राउंड ज़ीरो के पास बनने जा रहे मस्जिद को कहीं और बनाया जाएगा.

लेकिन मोहम्मद मुसरी ने बाद में कहा कि ऐसा कोई समझौता कभी हुआ ही नहीं था.

इससे पहले इमाम अब्दुल रऊफ़ के कार्यालय से एक बयान जारी करके कहा गया था कि ऐसा कोई समझौता नहीं हुआ है.

फ़्लोरिडा के गेन्सविले में 'डोव वर्ल्ड आउटरीच सेंटर' के समर्थकों की संख्या पचास से भी कम है. इसके पादरी टेरी जोन्स ने शनिवार को 'इंटरनेशनल बर्न ए क़ुरान डे' घोषित किया था और कहा था कि वे एक अलाव जलाकर उसमें क़ुरान की प्रतियाँ जलाएँगे.

इमाम फ़ैसल अब्दुल रऊफ़ कौन हैं?

इस घोषणा की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक प्रतिक्रिया हुई थी. मुस्लिम देशों के अलावा नैटो के प्रमुख और अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी फ़ौजों के कमांडर ने भी इसकी निंदा की थी और इसे रोकने की अपील की थी.

बाद में अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा था कि यदि फ़्लोरिडा की एक चर्च के पादरी क़ुरान की प्रतियाँ जलाते हैं तो 'चरमपंथ को बढ़ावा मिलेगा, अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान में अमरीकी सैनिकों पर हमले होंगे और अल क़ायदा को संगठन में भर्तियाँ करने का सुनहरा अवसर मिल जाएगा.'

अंतरराष्ट्रीय पुलिस संगठन इंटरपोल ने भी चेतावनी जारी की थी कि यदि अमरीकी पादरी क़ुरान की प्रतियाँ जलाने की अपनी धमकी को अंजाम देते हैं तो 'आतंकवादी' हमले हो सकते हैं और अनेक निर्दोष लोगों की जान को ख़तरा हो सकता है.

बयानों पर बयान

पहले पादरी टेरी जोन्स और इमाम मोहम्मद मुसरी ने एक साथ प्रेसवार्ता की.

Image caption दोनों धार्मिक नेता अब एक दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं

इसमें पादरी ने कहा कि वे अपनी योजना रद्द कर रहे है. उन्होंने दावा किया, "न्यूयॉर्क के इमाम रऊफ़ ने मस्जिद और सांस्कृतिक केंद्र कहीं और बनवाने का फ़ैसला किया है और हमने क़ुरान की प्रतियाँ जलाने की योजना को रद्द कर दिया है."

उन्होंने कहा था, "मैं फ़्लोरिडा के इमाम मुसरी के साथ न्यूयॉर्क जाउँगा और इमाम रऊफ़ से मिलूँगा."

उन्होंने यह भी कहा, "70 प्रतिशत से अधिक अमरीकी चाहते हैं कि ग्राउंड ज़ीरो के पास मस्जिद न बने, मुझे यक़ीन है कि इमाम रऊफ़ मस्जिद कहीं और बनवाने के लिए राज़ी हो जाएँगे."

इमाम रऊफ़ की ओर से यह बयान आ गया कि वे इसके लिए सहमत नहीं हैं और ऐसा कोई समझौता नहीं हुआ है.

इसके बाद मोहम्मद मुसरी ने बयान जारी किया कि पादरी के साथ ऐसा कोई समझौता हुआ ही नहीं था कि न्यूयॉर्क में बन रही मस्जिद कहीं और बनेगी.

उन्होंने कहा कि वे टेरी जोन्स के साथ न्यूयॉर्क जाने के लिए राज़ी हुए थे जिससे कि वे जाकर इमाम रऊफ़ सहित इस्लामिक सेंटर के दूसरे लोगों से चर्चा कर सकें.

फिर इस्लामिक सेंटर न्यूयॉर्क के इमाम फ़ैसल अब्दुल रऊफ़ ने कह दिया कि इस विषय में न तो उनकी पादरी टेरी जोन्स से बात हुई है और न इमाम मोहम्मद मुसरी से.

पाकिस्तान का इंटरपोल से आग्रह

इससे पहले अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने पादरी टेरी जोन्स की धमकी भरी घोषणा की व्यापक निंदा की थी. मिस्र, ईरान, इंडोनेशिया, पाकिस्तान और भारत से ऐसी कार्रवाई को रोकने की आवाज़ें बुलंद हुई थीं.

अंतरराष्ट्रीय पुलिस संगठन इंटरपोल ने चेतावनी जारी की थी कि क़ुरान की प्रतियाँ जलाने से 'आतंकवादी' हमले हो सकते हैं और अनेक निर्दोष लोगों की जान को ख़तरा हो सकता है.

ग़ौरतलब है कि 188 देशों के संगठन इंटरपोल ने ये 'एलर्ट' पाकिस्तान के गृह मंत्री रहमान मलिक के अनुरोध पर जारी किया था.

उन्होंने ख़ुद इंटरपोल के महासचिव रोनाल्ड नोबल से बात की थी.

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