विवादों के बीच अमरीका में 9/11 की नवीं बरसी

9/11 की बरसी
Image caption वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए हमले में मारी गई अपनी दादी माँ की तस्वीर के पास बैठा बच्चा

अमरीका में 9/11 हमलों की नौवीं बरसी पर हमलों में मारे गए लगभग तीन हज़ार लोगों को याद किया जा रहा है.

इस वर्ष ये बरसी घटनास्थल पर इस्लामी केंद्र बनाए जाने और कुरान को जलाने की धमकी के विवादों के बीच मनाई जा रही है.

न्यूयॉर्क में जुटे लोगों ने ठीक उस समय एक मिनट का मौन रखा जिस समय नौ साल पहले दो अपहृत विमानों में से पहला विमान वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की एक इमारत से टकराया था.

वहाँ हमले में मारे गए लोगों के संबंधियों ने अपने मृत आत्मीय लोगों के नाम पढ़कर उन्हें याद किया. इस सभा में अमरीकी उपराष्ट्रपति जो बाइडेन और उनकी पत्नी ने हिस्सा लिया.

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और रक्षा मंत्री रॉबर्ट गेट्स अमरीकी रक्षा विभाग पेंटागन में एक कार्यक्रम में शामिल हुए.11 सितंबर 2001 को पेंटागन पर भी हमला किया गया था.

राष्ट्रपति ओबामा ने वहाँ एक संदेश में कहा कि अमरीका इस्लाम के साथ युद्ध नहीं कर रहा बल्कि उसकी लड़ाई अल क़ायदा के साथ है जो धर्म को तोड़-मरोड़ रहा है.

ओबामा ने कहा,"सितंबर के उस दिन किसी धर्म ने हमपर हमला नहीं किया था. वो अल क़ायदा था."

राष्ट्रपति ओबामा की पत्नी मिशेल ओबामा और हमलों के समय राष्ट्रपति रहे जॉर्ज डब्ल्यू बुश की पत्नी लॉरा बुश पेन्सिल्वेनिया गईं जहाँ एक विमान तब गिरा जब यात्रियों और चालक दल के लोगों ने एक अपहर्ताओं से दोबारा विमान का नियंत्रण लेने की कोशिश की.

कुरान का विवाद

Image caption पादरी टेरी जोंस का कहना है कि उनका जागरूकता जगाने का उद्देश्य पूरा हो गया है

इस बीच फ़्लोरिडा में 9/11 की बरसी पर कुरान जलाने का आह्वान करनेवाले पादरी ने कहा है कि ऐसा कोई आयोजन सदा के लिए ख़त्म कर दिया गया है.

रेवरेंड टेरी जोंस ने अमरीकी टीवी चैनल एनबीसी से कहा,"हम निश्चित रूप से कुरान को नहीं जलाएँगे, ना आज, ना और कभी."

पादरी ने कहा कि उनका उद्देश्य पूरा हो गया है और उन्होंने, उनके शब्दों में - इस्लाम के एक ख़तरनाक पहलू - के बारे में जागरूकता जगाने का काम कर दिया है.

पादरी जोंस ने कुरान की प्रतियाँ जलाने का आह्वान न्यूयॉर्क में ग्राउंड ज़ीरो में एक मुस्लिम सांस्कृतिक केंद्र बनाने की योजना के विरोध में दिया था.

उनके इस आह्वान का अमरीका समेत सारी दुनिया में सख़्त विरोध हुआ था. बरसी के दिन भी मुख्यतः मुस्लिम देशों में प्रदर्शन हुए और सोमालिया और अफ़ग़ानिस्तान में रैलियाँ निकाली गईं.

पादरी जोंस ने कहा है कि वे न्यूयॉर्क में एक वरिष्ठ इमाम से मुलाक़ात कर प्रस्तावित मुस्लिम केंद्र की जगह बदलने के बारे में बातचीत करेंगे.

उन्होंने कहा कि उन्होंने अपना आह्वान इसलिए वापस लिया क्योंकि फ़्लोरिडा में एक इमाम ने उनसे कहा कि इस केंद्र को दूसरी जगह ले जाया जाएगा.

लेकिन मुस्लिम केंद्र की योजना से जुड़े लोगों का कहना है कि उनकी फ़्लोरिडा के इमाम से कोई बातचीत नहीं हुई है और वे अपनी योजना नहीं बदलेंगे.

भावनात्मक इस्तेमाल

Image caption वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमले के स्थान पर श्रद्धांजलि सभा

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि दोनों ही पक्ष अपने-अपने हितों के लिए इस अवसर का भावनात्मक इस्तेमाल करना चाहते हैं.

अमरीका में 11 सितंबर 2011 के हमले में मारे गए लोगों के कुछ रिश्तेदार इसे ठीक नहीं मानते हैं जबकि कुछ परिवार इसे इस आधार पर समर्थन दे रहे हैं कि इससे धार्मिक स्वतंत्रता के प्रति अमरीका की प्रतिबद्धता जाहिर होगी.

इस हमले में अपने पिता को खो चुकी स्टीफन पार्कर ने इस्लामिक केंद्र बनाने के समर्थन में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया. उन्होंने कहा, "मुझे यह देखकर दुख होता है कि जब लोग सभी मुसलमानों की तुलना अपहरणकर्ताओं से करते हैं. यह विवाद इतना बड़ा हो गया है कि 9/11 की बरसी पीछे चली गई है."

वहीं इस हमले में अपने पिता को खोने वाली सैली रीगनहॉर्ड का कहना है, "हमारी भावना है कि इस जगह मस्जिद का बनाया जाना 9/11 के हमले में मारे गए लोगों के परिवारों के प्रति सबसे बड़ा अपराध होगा."

समर्थन में बयान

इस्लामी केंद्र और मस्जिद के समर्थन में अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी बयान दिया था कि अमरीकी मुसलमानों को किसी भी निजी संपत्ति पर अपने पूजा स्थलों को बनाने का अधिकार है.

लेकिन अगले ही दिन उन्होंने यह भी कहा कि वह ग्राउंड ज़ीरो के इतने नज़दीक बनने वाले इस केंद्र को बनाने की बुद्धिमत्ता पर कोई राय नहीं दे रहे थे.

इसके अलावा कई रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक नेताओं ने भी इस केंद्र का विरोध किया है.

लेकिन केंद्र के समर्थकों का मानना है कि अमरीकी मुसलमानों को भी हर अमरीकी की ही तरह किसी भी जगह आज़ादी के साथ अपने पूजा स्थल बनाने का संवैधानिक हक़ है और उन्हे यह नहीं कहा जाना चाहिए कि कुछ जगहों पर वह मस्जिद नहीं बना सकते हैं.

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