ग्राउंड ज़ीरो: मस्जिद को लेकर तनाव बढ़ा

Image caption ग्राउंड ज़ीरो पर इन दिनों तनावपूर्ण माहौल है.

ग्यारह सितंबर के हमलों की बरसी से जुड़े कार्यक्रमों के कुछ ही घंटों बाद न्यूयॉर्क शहर में दो अलग-अलग गुटों ने प्रदर्शन किया है.

इनमें एक गुट उनका है जो ग्राउंड ज़ीरो के पास एक इस्लामिक सांस्कृतिक केंद्र और मस्जिद बनाना चाहते हैं तो दूसरा गुट वो है जो इसका विरोध कर रहा है.

इस केंद्र के समर्थन में सैंकड़ों लोग तख्तियां लिए खड़े थे जिनमें धार्मिक सहिष्णुता की अपील की गई थी और इस्लाम के प्रति भय की भावना को खत्म करने की मांग की गई थी..

वहीं से लगभग 300 मीटर की दूरी पर दूसरा गुट इस केंद्र का विरोध कर रहा था.

इनका कहना है कि “अमरीका का इस्लामीकरण बंद करो.''

भीड़ में कई बार लोगों के बीच गर्मागर्मी भी हो जा रही थी.

शांति बनाए रखने के लिए वहां भारी पुलिस बंदोबस्त किया गया था.

इस विवाद का साया ग्यारह सितंबर को हुए हमलों की बरसी से जुड़े कार्यक्रमों पर भी नज़र आया लेकिन दोनों ही पक्ष फ़िलहाल अपनी-अपनी जगह पर अड़े हुए हैं.

फ़्लोरिडा के एक चर्च के पादरी टेरी जोंस ने भी इस मस्जिद और सांस्कृतिक केंद्र का विरोध करने के लिए ही कुरान की प्रतियां जलाने का आह्वान किया था. लेकिन अब उन्होंने अपना फ़ैसला बदल लिया है.

Image caption मस्जिद का विरोध करनेवालों का कहना है कि ग्राउंड ज़ीरो के इतने पास उसे नहीं बनाना चाहिए.

एक टीवी चैनल से उन्होंने कहा है,” मैं निश्चित तौर पर कह सकता हूं कि हम कुरान को नहीं जलाएंगे. न आज, न फिर कभी.”

पादरी जोंस ने कहा है कि वे न्यूयॉर्क में एक वरिष्ठ इमाम से मुलाक़ात कर प्रस्तावित मुस्लिम केंद्र की जगह बदलने के बारे में बातचीत करेंगे.

उन्होंने कहा कि उन्होंने अपना आह्वान इसलिए वापस लिया क्योंकि फ़्लोरिडा में एक इमाम ने उनसे कहा कि इस केंद्र को दूसरी जगह ले जाया जाएगा.

लेकिन मुस्लिम केंद्र की योजना से जुड़े लोगों का कहना है कि उनकी फ़्लोरिडा के इमाम से कोई बातचीत नहीं हुई है और वे अपनी योजना नहीं बदलेंगे.

भावनात्मक इस्तेमाल

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि दोनों ही पक्ष अपने-अपने हितों के लिए इस अवसर का भावनात्मक इस्तेमाल करना चाहते हैं.

अमरीका में 11 सितंबर 2011 के हमले में मारे गए लोगों के कुछ रिश्तेदार इसे ठीक नहीं मानते हैं जबकि कुछ परिवार इसे इस आधार पर समर्थन दे रहे हैं कि इससे धार्मिक स्वतंत्रता के प्रति अमरीका की प्रतिबद्धता जाहिर होगी.

इस हमले में अपने पिता को खो चुकी स्टीफन पार्कर ने इस्लामिक केंद्र बनाने के समर्थन में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया. उन्होंने कहा, "मुझे यह देखकर दुख होता है कि जब लोग सभी मुसलमानों की तुलना अपहरणकर्ताओं से करते हैं. यह विवाद इतना बड़ा हो गया है कि 9/11 की बरसी पीछे चली गई है."

वहीं इस हमले में अपने पिता को खोने वाली सैली रीगनहॉर्ड का कहना है, "हमारी भावना है कि इस जगह मस्जिद का बनाया जाना 9/11 के हमले में मारे गए लोगों के परिवारों के प्रति सबसे बड़ा अपराध होगा."

Image caption मस्जिद का समर्थन करनेवाले कहते हैं कि इस्लाम के प्रति जो भय और घृणा का माहौल है उसे खत्म करने की ज़रूरत है.

इस्लामी केंद्र और मस्जिद के समर्थन में अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी बयान दिया था कि अमरीकी मुसलमानों को किसी भी निजी संपत्ति पर अपने पूजा स्थलों को बनाने का अधिकार है.

लेकिन अगले ही दिन उन्होंने यह भी कहा कि वह ग्राउंड ज़ीरो के इतने नज़दीक बनने वाले इस केंद्र को बनाने की बुद्धिमत्ता पर कोई राय नहीं दे रहे थे.

इसके अलावा कई रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक नेताओं ने भी इस केंद्र का विरोध किया है.

लेकिन केंद्र के समर्थकों का मानना है कि अमरीकी मुसलमानों को भी हर अमरीकी की ही तरह किसी भी जगह आज़ादी के साथ अपने पूजा स्थल बनाने का संवैधानिक हक़ है और उन्हे यह नहीं कहा जाना चाहिए कि कुछ जगहों पर वह मस्जिद नहीं बना सकते हैं.

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