अब भी जारी है बर्बरता: एमनेस्टी

Image caption इराक़ी जेलों में 30 हज़ार से ज़्यादा ऐसे बंधक हैं जिन पर आरोप साबित नहीं हुए हैं और वो जेलों में कैद हैं.

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल का कहना है कि इराक़ में बंधक बनाए जाने वाले कैदियों के साथ बर्बता पूर्ण व्यवहार किया जाता है और बिना आरोप साबित हुए कई साल उन्हें कैद में रखा जाता है.

इस दौरान उनके साथ क्रूर बर्ताव किया जाता है और उन्हें यातनाएं दी जाती हैं.

अपनी एक रिपोर्ट के ज़रिए एमनेस्टी ने इराक़ी सुरक्षा बलों पर कैदियों के अधिकारों के हनन का आरोप लगाया है.

रिपोर्ट में कहा गया है ऐसे हज़ारों मामले सामने आए हैं जिनमें कैदियों को मारपीट के ज़रिए जबरन अपराध कबूलने के लिए भी मजबूर किया गया है.

एमनेस्टी ने अमरीका की आलोचना करते हुए कहा कि इराक़ी सुरक्षा बलों के इस व्यवहार और इराक़ की जेलों में कैदियों के साथ किए जा रहे बर्ताव के बारे में जानते हुए भी अमरीका ने कैदियों को उनके हवाले किया.

इस बीच अमरीकी सेना के एक प्रवक्ता ने इस आलोचना को नकारा है. इराक़ी सरकार ने फ़िलहाल इस रिपोर्ट पर कोई टिपण्णी नहीं की है.

ग़ौरतलब है कि दो हफ़्ते पहले ही अमरीकी सरकार ने आधिकारिक तौर पर इराक़ में अपनी सैन्य गतिविधियों तो ख़त्म किया है.

सद्दाम की हुकूमत

रिपोर्ट में कहा गया है कि पूर्व इराक़ी शासक सद्दाम हुसैन की हुकूमत ख़त्म होने के सात साल बाद भी इराक़ी लोगों के साथ उसी तरह बर्बरता की जा रही है, जिसके लिए सद्दाम हुसैन की आलोचना की जाती थी.

एमनेस्टी की रिपोर्ट के अनुसार इराक़ में बंधक बनाए गए हज़ारों कैदियों में ब्रिटेन का एक नागरिक भी शामिल था.

68 वर्षीय रमज़ी शिहाब अहमद के पास इराक़ और ब्रिटेन दोनों की नागरिकता है. शिहाब अहमद को इराक़ के एक खुफ़िया कैदखाने रखा गया इस कादखाने के बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं थी.

शिहाब का कहना है कि कैद के दौरान कई बार उन्हें दमघोंटने वाली जगहों पर रखा गया और उनके गुप्तांगों पर बिजली के झटके दिए गए.

शिहाब का कहना है कि इस बर्बरता के चलते उन्होंने आख़िर इस बयान पर हस्ताक्षर कर दिए कि वो अल कायदा के साथ जुड़े हैं. शिहाब पर आज भी मामला चल रहा है.

इस बीच बीबीसी ने जब शिहाब के इन बयानों की पड़ताल की तो उन्हें सच पाया.

एमनेस्टी का कहना है कि ये सिर्फ़ एक मामला नहीं बल्कि इराक़ी सुरक्षा बलों की बर्बरता के ऐसे कई दूसरे उदाहरण हैं.

इराक़ी जेलों में तीस हज़ार से ज़्यादा ऐसे बंधक हैं जिन्हें अब तक न्यायालय के सामने पेश नहीं किया गया और उन पर कोई आरोप साबित नहीं हुआ है.

रिपोर्ट के अनुसार जबरन अपराध कबूलने की ये घटनाएं आम हैं और इन बयानों को न्यायालय में सबूत के तौर पर पेश किया जाता है.

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