जापान में फिर प्रधानमंत्री पद की दौड़

  • 14 सितंबर 2010
जापान के प्रधानमंत्री नाओतो कान
Image caption चुनाव में नाओतो के बुरे प्रदर्शन के चलते उनके प्रधानमंत्री बने रहने पर सवाल खड़े किए गए हैं

एक साल के दौरान जापान में तीसरी बार प्रधानमंत्री पद का संकट पैदा हो गया है. इस बार मुकाबला सत्ताधारी पार्टी के नेता नाओतो कान और इचिरो ओज़ावा के बीच है.

सत्ताधारी डेमाक्रेटिक पार्टी के नेता नाओतो कान और इचिरो ओज़ावा के बीच आर्थिक नीतियों को लेकर मतभेद हैं.

ओज़ावा डेमाक्रेटिक पार्टी के पुराने और अनुभवी नेता हैं. जापान में जुलाई में हुए चुनावों के दौरान नाओतो कान के बुरे प्रदर्शन के चलते ओज़ावा ने उनके प्रधानमंत्री बने रहने पर सवाल खड़े किए.

जानकारों का मानना है कि प्रधानमंत्री पद को लेकर दोनों के बीच कांटे की टक्कर है.

लचर अर्थव्यवस्था

जापान की लचर हो रही अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए ओज़ावा बचत को कम करने और उपभोक्ताओं को बढ़ावा देने का मत रखते हैं.

वहीं नाओतो का मानना है कि खर्च में कटौती और टैक्स बढ़ाकर ऋण से उबरा जाए.

जापान की अर्थव्यवस्था विश्व में दूसरे नंबर पर बने रहने में मुश्किलों का सामना कर रही है.

नाओतो और ओज़ावा की लोकप्रियता को लेकर पार्टी के सांसद भी बंटे हुए है. नाओतो जनता के बीच ज़्यादा लोकप्रिय हैं और ओज़ावा पार्टी के सांसदों के बीच.

हालांकि जो भी पार्टी का नेता चुना जाएगा उसका प्रधानमंत्री बनना तय है क्योंकि डेमाक्रेटिक पार्टी को संसद में बहुमत प्राप्त है.

ओज़ावा ने अगस्त में नेतृत्व को लेकर अपनी दावेदारी पेश की थी. उन्हें 2009 के चुनावों में डेमाक्रेटिक पार्टी की जीत का श्रेय दिया जाता है.

ओज़ावा का कहना है कि आर्थिक सुधारों के अलावा वो फुतेनमा में बने विवादास्पद अमरीकी सैन्य ठिकाने को ओकिनावा में स्थानांतरित करने का काम भी करेंगे.

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