टॉम ऑल्टर का मौन विरोध

टॉम ऑल्टर
Image caption अभिनेता टॉम ऑल्टर ने मसूरी के संरक्षण के लिए मौन व्रत शुरु किया

मशहूर अभिनेता टॉम ऑल्टर मसूरी के संरक्षण के लिये सड़क पर उतर आए हैं.

ब्रिटिशकालीन विरासत मसूरी के ऐतिहासिक घंटाघर के पुनरुत्थान और मसूरी के संरक्षण की मांग को लेकर उन्होने अनिश्चितकाल के लिये मौन व्रत शुरू कर दिया है.

अपने लिखित बयान में उन्होंने कहा है कि वो घंटाघर की याद में मातम मना रहे हैं.

करीब 70 साल पुराना मसूरी का घंटाघर इस ख़ूबसूरत हिल स्टेशन की शान और पहचान रहा है और शायद यहां आनेवाले हर सैलानी के एलबम का हिस्सा भी.

लेकिन उसकी जीर्ण-शीर्ण हालत के कारण मसूरी नगरपालिका के आदेश पर इसे मार्च में तोड़ दिया गया और अब तक वहां नया घंटाघर नहीं बनाया गया है.

टॉम ऑल्टर ने मांग की है कि अगर प्रशासन यहां पर घंटाघर बनाने की स्थिति में नहीं था तो इसे तोड़ा ही क्यों गया.

मसूरी से लगाव

टॉम यूं तो मुंबई में रहते हैं लेकिन मसूरी से उनका गहरा लगाव है क्योंकि यहां उनका बच्पन बीता है और यहां उनका पुराना घर भी है.

उन्होने कहा, “ये मेरी बचपन की यादों का हिस्सा है और इससे मेरे जैसे सैकडों लोगों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं.”

टॉम ऑल्टर ने मसूरी में बढ़ते हुए अतिक्रमण और ट्रैफिक प्रदूषण के खिलाफ भी अपना विरोध दर्ज कराया है.

सैकड़ों लोग टॉम ऑल्टर के धरना स्थल पर जमा हो गये हैं और खास तौर पर सैलानियों के लिये वो आकर्षण का केंद्र बन गये हैं.

मौन व्रत पर राजनीति

टॉम आल्टर के इस मौन व्रत पर राजनीति शुरू हो गई है. मसूरी नगरपालिका के अध्यक्ष और बीजेपी के नेता ओपी उनियाल ने बीबीसी से बातचीत में कहा, “टॉम ऑल्टर कांग्रेसी नेताओं के प्रभाव में आकर राजनीति कर रहे हैं. अगर उनको मातम ही मनाना था तो जब घंटाघर तोड़ा गया तब आना चाहिए था.”

उन्होंने बताया कि क़रीब एक करोड़ रुपए की लागत से नया घंटाघर बनाने की योजना है लेकिन पहली प्राथमिकता उन सड़कों और भवनों को ठीक करना है जो भारी बरसात में ख़राब हो गए हैं.

मसूरी ट्रेडर्स एसोसियेशन के अध्यक्ष रजत अग्रवाल ने कहा कि हम टॉम ऑल्टर की भावना का सम्मान करते हैं लेकिन उन्होंने अपनी बात रखने का जो तरीका अपनाया उससे आश्चर्य हो रहा है.

ऐसे आरोप भी लगाए जा रहे हैं कि घंटाघर के पास स्थित एक बड़े होटल को हो रहे अवरोध की वजह से और उसे फ़ायदा पंहुचाने के लिये सरकार ने इस ऐतिहासिक घंटाघर को तोड़ा है.

मसूरी के विधायक जोतसिंह घुनसोला ने कहा कि मसूरी सरकार की उपेक्षा का शिकार है और सरकार का ये रवैया शर्मनाक है. अपनी विरासत को बचाने की बजाय सरकार इन्हे तोड़ रही है.

बहरहाल टॉम ऑल्टर के मौन व्रत से मसूरी के बिगड़ते सौंदर्य को बहाल करने और उसके संरक्षण की बहस नए सिरे से शुरू हो गई है.

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