महिला को मौत की सज़ा

Image caption टेरेसा लेविस पर अपने पति और सौतेले बेटे की हत्या करवाने का आरोप है.

अमरीकी सुप्रीम कोर्ट ने वर्जीनिया राज्य की एक महिला को मिली मौत की सज़ा पर रोक लगाने से इंकार कर दिया है.

इकतालीस साल की टेरेसा लेविस को बृहस्पतिवार को इंजेक्शन देकर मारा जाना है और अगर ऐसा होता है तो वर्जीनिया राज्य में लगभग सौ साल में मौत की सज़ा पानेवाली वो पहली महिला होंगी.

लेविस पर भाड़े के दो लोगों की मदद से अपने पति और सौतेले बेटे की हत्या करवाने का आरोप है.

उनपर आरोप है कि उन्होंने अपने घर का एक दरवाज़ा हत्यारों के लिए खुला छोड़ दिया था.

जिन दो लोगों ने 2002 में हत्या को अंजाम दिया उन्हें उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई गई है.

लेविस की सुनवाई नौ जजों की बेंच कर रही थी जिसमें तीन महिलाएं भी थीं और उनमें से दो ने मौत की सज़ा रोकने के पक्ष में वोट दिया.

दिमागी कमज़ोरी

लेविस के बारे में उनके वकील ने कहा था कि उन्हें लिखने-पढ़ने और चीजों को समझने में मुश्किलें आती हैं.

वर्जीनिया के गवर्नर रॉबर्ट मैकडॉनेल ने कहा है कि लेविस ने अपना गुनाह कबूल किया है और किसी डॉक्टर या मनोचिकित्सक ने उन्हें दिमागी तौर पर असंतुलित या कमज़ोर नहीं पाया है.

लेविस के बारे में कहा गया कि वो अपने पति की संपत्ति हथियाना चाहती थीं और अपने सौतेले बेटे की मौत से हासिल होनेवाले बीमे की राशि पर भी उनकी नज़र थी.

अदालत की ओर से अपनी क्षमा याचिका रद्द होने के कुछ ही देर पहले सीएनएन के साथ एक बातचीत में लेविस ने कहा, “ मैं थोड़ी घबराई हुई हूं और डरी हुई हूं. लेकिन अंदर से मैं शांत हूं क्योंकि जीसस मेरे साथ हैं.”

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