खाद्य पदार्थों की क़ीमतें कम होंगी

रुस में गेहूं की फ़सल
Image caption रूस में गेहूँ की फ़सल ख़राब होने से आशंका और गहरा गई थी.

संयुक्त राष्ट्र की खाद्य एवं कृषि संगठन की विशेष बैठक में कहा गया है कि अच्छी खेती और खाद्य पदार्थों का पर्याप्त स्टॉक होने की वजह से आने वाले दिनों में खाद्य पदार्थों की क़ीमतें घट सकती हैं.

खाद्य एवं कृषि संगठन यानि एफएओ की एक महत्वपूर्ण बैठक रोम में हुई जिसमें दुनिया भर में अनाज की क़ीमतें तेज़ी से बढ़ने की आशंका पर विचार किया गया.

एफएओ का कहना है कि पिछले एक साल में खाद्य पदार्थों के इंडेक्स में 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है और इसे देखते हुए यह एक गंभीर मुद्दा बन गया है.

इस बैठक में कई विशेषज्ञों ने भी हिस्सा लिया जिनका कहना था कि दुनिया भर में खेती अच्छी हुई है और खाद्य पदार्थों का स्टॉक पर्याप्त मात्रा में है, इसलिए ऐसी स्थिति में बढ़ी हुई क़ीमतें कम होंगी.

उल्लेखनीय है कि हालात उतने ख़राब नहीं है जितने 2007 और 2008 में थे जब खाद्य पदार्थों की क़ीमतें बहुत बढ़ गई थीं और कुछ देशों में खाद्य पदार्थों की छीना झपटी के बाद दंगे तक हो गए थे.

इस बैठक में रूसी कृषि विभाग के अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया हैं.

रूस ने इस वर्ष गेहूँ के निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है जिससे गेहूँ की क़ीमतें बहुत बढ़ने की आशंका जताई जा रही है.

अनाज की क़ीमतों में अगर और बढ़ोतरी होती है तो विकासशील देशों के ग़रीब लोग आर्थिक बोझ सहन नहीं कर सकेंगे.

रूस में भीषण गर्मी पड़ने की वजह से गेहूँ की फ़सल बुरी तरह प्रभावित हुई थी जिसके बाद यह निर्णय लिया गया था.

इसके अलावा चीन और पाकिस्तान में आई बाढ़ की वजह से भी गेहूँ की फ़सल तबाह हुई है जबकि पाकिस्तान गेहूँ की सबसे अधिक खपत वाले देशों में है.

रणनीति बनाना ज़रूरी

वर्ष 2007-2008 की तरह बहुत तेज़ी से अनाज की क़ीमतें बढ़ने की आशंका व्यक्त की जा रही हैं.

अनाज की क़ीमतों की वजह से मोज़ाम्बिक में दंगे तक भड़क चुके हैं और कई अन्य देशों में ग़रीब लोगों का जीवन बेहद मुश्किल हो गया है.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इसे एफ़एओ ने आपात बैठक नहीं कहा है क्योंकि वे दुनिया भर में घबराहट नहीं फैलाना चाहते लेकिन स्थिति सचमुच चिंताजनक है.

एफ़एओ का कहना है कि स्थिति 2007-08 की तुलना में अपेक्षाकृत बेहतर है लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि अभी से क़ीमतों पर लगाम लगाने की योजना बनाने की ज़रूरत है.

Image caption बांग्लादेश में चावल की क़ीमत एक साल में 25 प्रतिशत बढ़ गई है

दुनिया भर में अनाज की क़ीमतें अपने अधिकतम स्तर पर हैं और अब भी उनमें वृद्धि लगातार जारी है.

पिछले साल के मुक़ाबले अनाज की क़ीमतों के एफ़एओ के सूचकांक में 25 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है.

एफ़एओ का कहना है कि सरकारों को आपात स्थिति के लिए स्टॉक रखना चाहिए और खाद्यान्न के बाज़ार पर नियंत्रण और नियमन बढ़ाना चाहिए.

भारत में खाद्यान्न की क़ीमतों में लगातार छह सप्ताह से वृद्धि हो रही है.

भारतीय वाणिज्य मंत्रालय कृषि उत्पादों का सूचकांक पिछले एक वर्ष में 15 प्रतिशत ऊपर जा चुका है. यह सूचकांक चावल, दाल और सब्ज़ियों के थोक मूल्य पर आधारित है.

जानकारों का कहना है कि इस बार मानसून की बारिश अच्छी रहने के कारण आने वाले महीनों में कृषि उत्पादों की क़ीमत में कमी आने की संभावना है.

बंग्लादेश के भी मुख्य आहार, चावल की क़ीमतें एक साल में 25 प्रतिशत बढ़ गई हैं.

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