चिली के खनिकों के लिए नई आशा

  • 26 सितंबर 2010
कैपसूल
Image caption खदान मे फंसे एक खनिक की बेटी इस कैपसूल में ख़ुद खड़े हो कर उस पल की ख़ुशी का अंदाज़ा लगा रही हैं

चिली की एक खदान में फंसे 33 खनिकों को बाहर निकालने के लिए एक विशेष पिंजरेनुमा कैपसूल खदान स्थल पर पहुंच गया है.

खदान स्थल पर डेरा डाले हुए खनिकों के संबंधियों में उस समय उत्साह की लहर दौड़ गई जब ये कैपसूल वहां लाया गया.

इस कैपसूल को देखते ही सभी लोगों ने ख़ुशी से तालियां बजाईं.

चिली के इंजीनियर एक 'शाफ़्ट' को 'ड्रिल' कर ज़मीन से क़रीब 700 मीटर नीचे उतारने के काम में लगे हुए हैं.

जैसे ही ये काम पूरा होगा, वैसे ही स्टील के इस कैपसूल को खदान के नीचे उतार दिया जाएगा.

ये स्टील का कैपसूल एक एक करके सभी 33 खनिकों को खदान से सुरक्षित बाहर ले आएगा.

बताया जा रहा है कि इस 'शाफ्ट' से भेजे स्टील कैपसूल के ज़रिए एक एक खनिक को निकालने में 20 से 30 मिनट का वक्त लगेगा.

फ़ीनिक्स की मिसाल

बेहद संकरे और लंबे स्टील के पिंजरे को 'फ़ीनिक्स' नाम दिया गया है.

इस पिंजरे के निर्माताओं को आशा है कि खदान में फंसे खनिकों को इसके ज़रिए नया जीवन मिलेगा, ठीक वैसे ही, जैसे यूनानी पौराणिक कथाओं में फ़ीनिक्स पक्षी, राख से पुनर्जीवत हुआ था.

पिछले 7 हफ़्तों से भी ज़्यादा समय से ये खनिक चिली के कोपिआपो शहर के सैन जोस खदान में फंसे हुए हैं.

ज़मीन के क़रीब 2300 फ़ुट नीचे काम कर ये खनिक उस समय वहीं फंसे रह गए जब उनके ऊपर एक चट्टान खिसक कर गिर गई.

वैसे एक खनिक को खदान से बाहर लाने में लगभग आधा घंटा ही लगेगा लेकिन इस कैपसूल में ऑक्सीजन भरी हुई है जो कि 90 मिनट तक चलेगी.

साथ ही कैपसूल में संचार उपकरण भी लगे हुए हैं, जिससे खनिक ज़मीन के ऊपर इंजीनियरों के संपर्क में रह सकें.

हालांकि खनिकों को बाहर निकालने के लिए बनाया गया ये उपकरण समय से पहले ही खदान स्थल पर पहुंच गया है.

लेकिन चिली के खदान मंत्री लॉरेंस गोलबौर्न ने इन अटकलों को ख़ारिज कर दिया है कि निर्धारित समय से पहले ही खनिकों को निकाला जा सकेगा.

खनिकों को खदान से बाहर निकालने का समय नवंबर के पहले सप्ताह में निर्धारित है.

खनिकों के बचाव की मूल योजना के तहत ऑस्ट्रेलिया से एक हाइड्रौलिक बोरिंग मशीन, स्ट्रैटा 950 मंगाई गई थी.

इस खा़स मशीन की तीन ड्रिलों ने सुरंग को चौड़ा करने का काम कर रही हैं.

पहली ड्रिल मशीन कल तक 442 मीटर तकत खुदाई कर चुकी थी.

दूसरी मशीन 175 मीटर तक खुदाई करके अपना पायलेट छेद पूरा कर चुकी है और तीसरी ड्रिल मशीन जो शाफ़्ट को नीचे पहुंचाएगी, कल तक 62 मीटर पर पहुंची थी.

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