यौन रोगों से संक्रमित किया, माफ़ी मांगी

Image caption सिफ़लिस के बैक्टीरिया की तस्वीर

अमरीका ने 40 के दशक में ग्वाटेमाला के सैंकड़ों लोगों को शोध के लिए उन्हें बिना बताए यौन बीमारियों से संक्रमित करने के लिए माफ़ी मांगी है.

वेलेस्ली कॉलेज की एक प्रोफ़ेसर सूज़न रेवरबी के अनुसार लगभग साठ साल पहले अमरीकी मेडिकल शोधर्कताओं ने लगभग सात सौ लोगों को सिफ़लिस और गनोरिया जैसी बीमारियों से संक्रमित किया.

शोध ये देखने के लिेए था कि इन बीमारियों को पेनिसिलिन के इस्तेमाल से रोका या ठीक किया जा सकता है या नहीं.

प्रोफ़ेसर रेवरबी ने बताया है कि जिनपर ये शोध किया गया वो या तो जेलों के क़ैदी थे या मानसिक रूप से अस्वस्थ थे और उन्हें इस बारे में बताया नहीं गया.

बीमारी उन्हें सिफ़लिस से ग्रस्त वेश्याओं के साथ सेक्स के ज़रिए या फिर सीधा इंजेक्शन लगाकर दी गई.

Image caption विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने उन सभी लोगों से माफ़ी मांगी है जो इसके शिकार बने.

अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने इस घटना का अनैतिक और घृणात्मक कहते हुए माफ़ी मांगी है. स्वास्थ्य मंत्री कैथलीन सेबेलियस ने भी मांगी है.

क्लिंटन ने कहा कि ये अमरीकी मूल्यों का परिचायक नहीं है और अब इसके ख़िलाफ़ क़ानून भी है.

इस बीमारी से ग्रस्त मरीज़ों का इलाज किया गया लेकिन ये स्पष्ट नहीं है कि सभी इससे मुक्त हुए या नहीं.

अभी तक किसी तरह के मुआवज़े का एलान नहीं हुआ है लेकिन चालीस के दशक में चार सालों तक चले इस शोध की जांच की जाएगी.

ये भी पता चला है कि ग्वाटेमाला की सरकार ने इस परीक्षण की इजाज़त दी थी.

संबंधित समाचार