ब्राज़ील में महिला राष्ट्रपति के आसार

Image caption टीवी पर गुरुवार को हुई बहस

ब्राज़ील में राष्ट्रपति चुनाव अभियान ज़ोरों पर है और ताज़ा जनमत सर्वेक्षण बता रहे हैं कि मौजूदा राष्ट्रपति लूला डि सिल्वा के समर्थन वाली सत्ताधारी पार्टी की उम्मीदवार डिल्मा रुसेफ़ को बढ़त हासिल है.

डिल्मा रुसेफ़ अगर चुनाव जीतती हैं तो वे देश की पहली महिला राष्ट्रपति होंगी.

गुरुवार की रात को टेलीविज़न पर मुख्य उम्मीदवारों के बीच हुई बहस के बाद ऐसा लग रहा है कि सत्ताधारी पार्टी की उम्मीदवार पहले ही दौर में विजयी हो सकती हैं.

रविवार को ब्राज़ील में राष्ट्रपति चुनाव होने वाले हैं और वहाँ के संविधान के तहत मौजूदा राष्ट्रपति लूला डि सिल्वा तीसरी बार चुनाव नहीं लड़ सकते हैं इसलिए उन्होंने अपना सारा राजनीतिक दम डिल्मा रुसेफ़ के समर्थन में लगा दिया है.

टीवी पर हुई बहस के बारे में लोगों का कहना है कि उससे लोगों के रुख़ में कोई बदलाव नहीं आने वाला है क्योंकि वर्कर्स पार्टी के नेता और मौजूदा राष्ट्रपति लूला डि सिल्वा देश में काफ़ी लोकप्रिय हैं.

उनके समर्थन की वजह से डिल्मा रुसेफ़ को विपक्षी उम्मीदवार होसे सेरा के ऊपर काफ़ी बढ़त मिली हुई है, वैसे पिछले कुछ समप्ताह में सेरा के प्रति समर्थन थोड़ा बढ़ा है लेकिन डिल्मा के पराजित होने के आसार नहीं दिख रहे हैं.

मौजूदा राष्ट्रपति की लोकप्रियता

सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी के होसे सेरा राष्ट्रपति चुनाव को अगले दौर में ले जाना चाहते हैं, अगर किसी एक उम्मीदवार की स्पष्ट जीत नहीं होती तो ब्राज़ील में दूसरे दौर का मतदान होता है.

ब्राज़ील में लूला डि सिल्वा इतने लोकप्रिय हैं कि विपक्षी नेता सेरा को कहना पड़ रहा है कि वे ही मौजूदा राष्ट्रपति की उपलब्धियों को बेहतर तरीक़े से और आगे बढ़ा सकते हैं.

किसी भी विपक्षी उम्मीदवार के लिए यह अच्छी स्थिति नहीं है कि वह सत्ताधारी पार्टी के कामों की आलोचना भी न कर पाए.

ब्राज़ील की अर्थव्यवस्था में तेज़ी से प्रगति हो रही है, जहाँ दुनिया के ज़्यादातर देश अर्थव्यस्था में सुस्ती का सामना कर रहे हैं वहीं ब्राज़ील में भारत की ही तरह ज़ोरदार तेज़ी दिख रही है.

ब्राज़ील की चुनौतियाँ भारत से काफ़ी मिलती-जुलती हैं जहाँ तेज़ गति से विकास तो हो रहा है लेकिन आबादी का एक बड़ा हिस्सा अभी भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है.

ब्राज़ील में आधारभूत सुविधाओं का विकास, शिक्षा के स्तर में सुधार और लोगों के लिए नए अवसर पैदा करना अगले राष्ट्रपति की बड़ी प्राथमिकताएँ होंगी.