सेना का सस्ता पुल कितना टिकाऊ?

  • 1 अक्तूबर 2010
 नेहरु स्टेडियम के पास पुल.
Image caption सेना ने नेहरु स्टेडियम के पास ढहे पुल को नए सिरे से तैयार किया है.

दिल्ली के जवाहर लाल नेहरु स्टेडियम के बाहर 21 सितंबर को ढह गए एक 'फुट ओवरब्रिज' को भारतीय थल सेना ने एक हफ़्ते में तैयार कर आयोजकों को सौंप दिया है.

लोक निर्माण विभाग द्वारा बनाया जा रहा ये निर्माणाधीन पुल 21 सितंबर को भारी बारिश के बीच ढह गया था जिससे वहां काम कर रहे कम से कम 23 मजदूर घायल हो गए थे.

भारतीय थल सेना की 'मद्रास सैपर्स' नामक दस्ते ने 95 मीटर लंबे इस ‘बेली ब्रिज’ को राष्ट्रमंडल खेलों के मुख्य आयोजन स्थल जवाहरलाल नेहरु स्टेडियम पहुँचने वाले दर्शकों की सहूलियत के लिए तैयार किया गया है.

इस पुल का प्रयोग खिलाडियों और अधिकारियों को पार्किंग स्थल तक पहुँचाने के लिए भी किया जायेगा.

Image caption भारतीय सेना की 'मद्रास सैपर्स' टुकड़ी ने पुल को एक हफ़्ते में बना दिया.

पुल ढ़हने पर दिल्ली सरकार को भारी आलोचना झेलनी पड़ी थी और इसी निर्माणाधीन पुल के पास बन रहे एक और 'फुट ओवरब्रिज' का काम रोक दिया गया था.

दुर्घटना के चंद दिनों के भीतर ही दिल्ली सरकार ने भारतीय थल सेना से इस पुल के पुनर्निर्माण के लिए मदद की गुहार लगाई थी.

सेना के इंजीनियरों ने शनिवार को इस पुल के पुनर्निर्माण का काम शुरू किया था और शुक्रवार के रोज़ इस पुल को आयोजकों को सौंप दिया गया है.

हालांकि शुक्रवार की शाम भी पुल के कुछ हिस्सों पर सेना के कुछ कर्मियों द्वारा निरीक्षण का काम चल रहा था लेकिन पुल पर आवाजाही कब से शुरू होगी इस बात पर दिल्ली सरकार और राष्ट्रमंडल खेल आयोजकों की तरफ से अभी कोई बयान नहीं आया है.

ये नवनिर्मित पुल कितना टिकाऊ रहेगा, इस बात का फैसला भी तभी हो सकेगा जबसे इसपर लोगों की आवाजाही शुरू होगी.

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