प्रकृति पूजा को मिला धर्म का दर्जा

ड्रूएड समुदाय
Image caption ड्रूएड समुदाय के लोग प्रकृति के पुजारी हैं

ब्रिटेन के चैरिटी कमीशन ने प्राकृतिक ताक़तों की पूजा करने वाले ‘ड्रूएड नेटवर्क’ को धार्मिक दर्जा दे दिया है.

प्रकृति की पूजा करने वाले ‘ड्रूएड नेटवर्क’ के प्रयासों को सार्वजनिक हित में मानते हुए चैरिटी कमीशन ने उसे कल्याणकारी संस्थाओं में भी शामिल कर लिया है.

ईसाई धर्म के अस्तित्व में आने से हज़ारों साल पहले से ही ब्रिटन में ड्रूएड समुदाय के लोग प्रकृति की पूजा करते आए हैं. लेकिन पहली बार इस पद्धति को धर्म का दर्जा देकर उसे कल्याणकारी संस्था भी घोषित किया गया है.

चार सालों तक लगातार अध्ययन के बाद चैरिटी कमीशन ने ये माना कि वास्तव में प्रकृति की पूजा करने की ड्रूएड समुदाय की गतिविधियां सार्वजनिक हित में हैं.

चैरिटी कमीशन ने कहा है कि यह पूजा पद्धति आध्यात्मिकता के साथ साथ सामाजिक ढांचे के साथ नैतिक तालमेल भी रखती है इसीलिए इसे अन्य कल्याणकारी संस्थाओं की तरह टैक्स में छूट और बाक़ी फ़ायदे भी मिलेंगे.

पूजा पद्धति

ड्रूएड समुदाय किसी एक ईश्वर की पूजा नहीं करता बल्कि प्रकृति में मौजूद सभी ताक़तों की आराधना करता है, चाहे वह बिजली का कड़क हो या बादलों की गरज, पहाड़ हों या नदियां.

इस समुदाय की धार्मिक रस्में और ख़ासतौर पर बदलते मौसमों के साथ जुड़ी हुई है.

ड्रूएड समुदाय की प्रकृति पूजा सबसे पहले सामने आई कुछ आध्यात्मिक गतिविधियों में से एक रही है.

ड्रूएड नेटॉवर्क के किंग आर्थर पैंड्रैगन में बीबीसी को बताया कि, प्रकृति पूजा को धार्मिक विश्वास मान लिया जाना ये दर्शाता है कि आधुनिक समाज में लोगों की आध्यात्मिकता में दिलचस्पी किस क़दर बढ़ती जा रही है.

इस घोषणा पर ख़ुशी जताते हुए आर्थर पैंड्रेगन ने कहा, "मैं यह मानता हूं कि लोग अपनी जड़ों की तरफ़ वापस लौटना चाहते हैं और जहां वे धर्मनिरपेक्ष समाज को देखते हैं. चैरिटी कमीशन का यह फ़ैसला दर्शाता है कि हमारी आस्था कितनी महत्वपूर्ण है."

संवाददाताओं का मानना है कि पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं में घटती आस्था और पर्यावरण तथा प्राकृतिक संरक्षण में लोगों की बढ़ती दिलचस्पी के कारण ब्रिटन में ड्रूएड समुदाय का पुनरुत्थान हुआ है.

ब्रिटन के अलावा ड्रूएड समुदाय के लोग यूरोप में भी हज़ारों सालों से सक्रिय रहे हैं.

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