'यौन संक्रमण का प्रयोग अपराध'

  • 2 अक्तूबर 2010
सिफ़लिस के बैक्टीरिया
Image caption सिफ़लिस से मौत तक हो सकती है

ग्वाटेमाला के राष्ट्रपति अल्वारो कोलोम ने कहा है कि साठ साल पहले अमरीका ने शोध के लिए सैंकड़ों लोगों को जिस तरह यौन बीमारियों से संक्रमित किया वह 'मानवता के ख़िलाफ़ अपराध' था.

40 के दशक में इस शोध के तहत मानसिक रोगियों और क़ैदियों को उनकी अनुमति या जानकारी के बिना सिफ़लिस और संक्रमित किया गया था.

अब राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इसके लिए माफ़ी मांगी है और कहा है वह प्रयोग अमरीकी मूल्यों के ख़िलाफ़ था.

वेलेस्ली कॉलेज की एक प्रोफ़ेसर सूज़न रेवरबी के अनुसार लगभग साठ साल पहले अमरीकी मेडिकल शोधर्कताओं ने लगभग सात सौ लोगों को सिफ़लिस और गनोरिया जैसी बीमारियों से संक्रमित किया गया था.

प्रोफ़ेसर रेवरबी ने बताया है कि जिन पर ये शोध किया गया उन्हें सिफ़लिस से ग्रस्त वेश्याओं के साथ सेक्स के ज़रिए या फिर सीधा इंजेक्शन लगाकर संक्रमित किया गया.

सिफ़लिस की वजह से हृदय रोग, अंधत्व और मानसिक रोग जैसी गंभीर बीमारियाँ हो सकती हैं और यहाँ तक कि रोगी की मौत भी हो सकती है.

अमरीकी शोधकर्ताओं ने यह शोध ये देखने के लिए किया था कि इन बीमारियों को पेनिसिलिन के इस्तेमाल से रोका या ठीक किया जा सकता है या नहीं.

यह पता नहीं है कि जिन्हें संक्रमित किया गया वे ठीक हुए भी या नहीं.

इन प्रयोगों के लिए ग्वाटेमाला की तत्कालीन सरकार ने अनुमति दी थी.

अभी तक इन प्रयोगों के लिए किसी तरह के मुआवज़े की घोषणा नहीं की गई है लेकिन 1946 से 1948 के बीच हुए इन प्रयोगों की जाँच के आदेश दिए गए हैं.

'अपराध'

बीबीसी को दिए एक साक्षात्कार में राष्ट्रपति कोलोम ने कहा है कि जिन लोगों पर प्रयोग किए गए वह उनके मानवाधिकारों का हनन था.

उन्होंने कहा, "हो सकता है कि ऐसी घटनाएँ दुनिया के दूसरे देशों में भी हुई होंगीं लेकिन राष्टपति और ग्वाटेमाला के नागरिक की तरह मेरी भावनाएँ हैं कि अच्छा होता कि ऐसे प्रयोग ग्वाटेमाला में न किए गए होते."

उनका कहना है कि इन ख़बरों की ग्वाटेमाला के नागरिकों के बीच और मीडिया में तीखी प्रतिक्रिया हुई है.

अमरीकी राष्ट्रपति के कार्यालय व्हाइट हाउस के प्रवक्ता रॉबर्ट गिब्स ने कहा कि यह ख़बर दुखद और निंदनीय है.

अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन और स्वास्थ्य मंत्री कैथलीन सेबेलियस ने इस घटना को अनैतिक और घृणात्मक कहते हुए माफ़ी मांगी है.

क्लिंटन ने कहा कि ये अमरीकी मूल्यों का परिचायक नहीं है और अब इसके ख़िलाफ़ क़ानून भी है.

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