ब्राज़ील में राष्ट्रपति चुनाव

मतपेटियां
Image caption ब्राज़ील के अगले राष्ट्रपति का नाम सोमवार की सुबह तक सामने आ जाएगा

ब्राज़ील में राष्ट्रपति चुनावों के लिए रविवार को लगभग 11 करोड़ 35 लाख मतदाता देश का अगला राष्ट्रपति चुनने के लिए मतदान कर रहे हैं.

मौजूदा राष्ट्रपति लुई इनाचियो दे लूला डिसिल्वा अपने दो कार्यकाल पूरे कर चुके हैं और ब्राज़ील के संविधान के मुताबिक वे तीसरी बार चुनाव नहीं लड़ सकते.

लेकिन उनकी पूर्व चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ और सत्ताधारी वर्कर्स पार्टी की उम्मीदवार डिल्मा रुसेफ़ के चुनाव जीतने के आसार दिख रहे हैं.

डिल्मा रुसेफ़ अगर चुनाव जीतती हैं तो वे देश की पहली महिला राष्ट्रपति होंगी.

लेकिन राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे दौर में जाने से बचने के लिए डिल्मा रूसेफ़ को 50 फ़ीसदी मतों की ज़रूरत होगी.

जनमत सर्वेक्षण

हफ़्ते भर पहले ऐसा ऐसा लग रहा था कि सत्ताधारी पार्टी की उम्मीदवार डिल्मा रूसेफ़ पहले ही दौर में विजयी हो सकती हैं, क्योंकि वर्कर्स पार्टी के नेता और मौजूदा राष्ट्रपति लूला डि सिल्वा का उन्हें ज़बर्दस्त समर्थन प्राप्त है.

लेकिन शनिवार को हुए ताज़ा जनमत सर्वेक्षणों में यह सामने आया है कि रुसेफ़ को विपक्षी उम्मीदवार सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी के होसे सेरा कड़ी टक्कर दे सकते हैं.

सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी के होसे सेरा राष्ट्रपति चुनाव को अगले दौर में ले जाना चाहते हैं, क्यों कि अगर किसी एक उम्मीदवार की स्पष्ट जीत नहीं होती तो ब्राज़ील में दूसरे दौर का मतदान होता है.

डिल्मा रूसेफ़ न तो पहले दौर में ही अपनी सपष्ट जीत का दावा कर रही हैं, और न ही वे दूसरे दौर के चुनावों की संभावना से इंकार कर रही हैं.

उनका कहना है, “ब्राज़ील की चुनाव प्रक्रिया का हम सम्मान करते हैं. यहां मतदान के दो चरण होते हैं. या तो आप पहले ही दौर में बहुमत से विजयी हो जाएं या फिर दूसरे दौर के मतदान का सामना करें.”

सत्ताधारी पार्टी की उम्मीदवार डिल्मा रूसेफ़ के शब्द.

हालांकि जनमत सर्वेक्षण के नतीजे लगातार ये दिखाते रहे हैं, कि अगर राष्ट्रपति चुनाव दूसरे दौर में भी चले गए, तो भी डिल्मा रूसेफ़ भारी मतों से विजयी हो सकती हैं.

ब्राज़ील में इलैक्ट्रॉनिक मशीनों से मतगणना होगी इसलिए सोमवार की सुबह ब्राज़ील के लोग जान जाएंगे कि उनका अगला राष्ट्रपति कौन है.

चुनौतियां

ब्राज़ील की अर्थव्यवस्था में तेज़ी से प्रगति हो रही है, जहाँ दुनिया के ज़्यादातर देश अर्थव्यस्था में सुस्ती का सामना कर रहे हैं वहीं ब्राज़ील में भारत की ही तरह ज़ोरदार तेज़ी दिख रही है.

ब्राज़ील की चुनौतियाँ भारत से काफ़ी मिलती-जुलती हैं जहाँ तेज़ गति से विकास तो हो रहा है लेकिन आबादी का एक बड़ा हिस्सा अभी भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है.

ब्राज़ील में आधारभूत सुविधाओं का विकास, शिक्षा के स्तर में सुधार और लोगों के लिए नए अवसर पैदा करना अगले राष्ट्रपति की बड़ी प्राथमिकताएँ होंगी.

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