केंद्र पर बरसे कश्मीरी नेता

Image caption कश्मीर के सांसदों ने केंद्र सरकार से सेना की ज़्यादतियों पर कार्रवाई करने की मांग की

जम्मू कश्मीर की विधानसभा में कश्मीर घाटी की स्थिति पर हुई एक विशेष बहस में केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया गया.

सीपीआइएम के मोहम्मद यूसुफ़ तारिगामी ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर केंद्र सरकार मौजूदा स्थिति से सबक़ नहीं लेती तो कश्मीर अफ़ग़ानिस्तान जैसे खंडहर में बदल जाएगा.

तारिगामी ने कहा कि सरकार को राज्य में जवाबदेही की व्यवस्था करनी चाहिए.

उन्होने खेद व्यक्त करते हुए कहा कि भारत सरकार हत्याओं में शामिल रहे सैनिकों पर मुक़दमा चलाने से इंकार कर रही है.

उन्होने पथरीबल और मच्छिल के मामलों का ज़िक्र किया जहां सेना ने एक भिड़ंत में आठ नागरिकों को विदेशी चरमपंथी कह कर मार डाला था.

तारिगामी ने कहा, “कुछ लोगों का तर्क है कि अगर दोषी सैनिकों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की गई तो सेना का मनोबल गिर जाएगा. क्या अजीब तर्क है. कश्मीर के लोगों के मनोबल के बारे में कोई नहीं सोचता”.

श्री तारिगामी ने कहा कि कश्मीर में भारत सरकार की विश्वसनीयता शून्य से भी नीचे चली गई है.

उन्होने कहा कि भारत सरकार को राज्य के राजनीतक दलों के साथ बातचीत करने के लिए सांसदों का एक दल गठित करना चाहिए.

पैंथर्स पार्टी के हर्षदेव सिंह ने भी राज्य प्रशासन में घुसपैठ के लिए केंद्र की निंदा की.

उन्होने भारत के गृहमंत्री पी चिदम्बरम पर आरोप लगाया कि उन्होने पत्थर फेंकने के आरोप में गिरफ़्तार किए गए कश्मीरी युवकों को रिहा करने और घाटी के स्कूल खोलने के आदेश दिए.

हर्षदेव सिंह ने कहा, “पी चिदम्बरम एक तरह से जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री हैं”.

उन्होने हाल में कश्मीर आए सांसदों के सर्वदलीय शिष्टमंडल की पृथक्तावादी नेताओं के घर जाकर मिलने की भी आलोचना की.

उन्होने कहा कि पृथक्तावादी नेताओं को एक कड़ा संदेश जाना चाहिए कि “कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और रहेगा”.

भारतीय जनता पार्टी के प्रोफ़ैसर चमनलाल गुप्ता ने कहा कि कश्मीर घाटी का मौजूदा संकट राज्य सरकार के कुशासन की वजह से पैदा हुआ है.

भाजपा के ही अशोक खजूरिया ने भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को कश्मीर की स्थिति के लिए ज़िम्मेदार ठहराते हुए कहा कि मामले को संयुक्त राष्ट्र में ले जाकर कश्मीर की समस्या नेहरू ने पैदा की.

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