शिकायतों का ताँता

  • 6 अक्तूबर 2010
चित्रः एएफ़पी

राष्ट्रमंडल खेलों के शुरू होने के दो दिन बाद से ही व्यवस्था से जुड़ी ख़ामियों की सूची लंबी होती जा रही है.

तीन अक्तूबर को हुए रंगारंग उदघाटन समारोह का रंग अभी उतरा भी नहीं है, इस बीच आयोजकों और सरकार ने मिल कर इन ख़ामियों पर बारीक नज़र रखनी शुरू कर दी है.

इंडियन एक्सप्रेस अख़बार में छपी एक ख़बर के मुताबिक़ 'गेम्स टाइम्स मैनेजमेंट' नामक ग्रुप ने खेलों के शुरूआती दो दिनों पर बनाई अपनी अंतरिम रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख किया है.

ख़स्ताहाल परिवहन व्यवस्था, हड़ताल पर जा रहे स्वयंसेवक, दिल्ली शहर में निरंतर रास्ते भूलने वाले बसों के ड्राइवर, मदद के लिए बने वीडियो बोर्ड्स का नदारद होना और आयोजन कराने में लगे कर्मियों के लिए उपलब्ध कराए जा रहे ख़राब भोजन जैसी बातों का ज़िक्र इस रिपोर्ट में प्रमुखता से दिखता है.

निगरानी रख रहे इस दल में राष्ट्रमंडल खेलों से जुडी सभी सरकारी एजेंसियाँ, आयोजन समीति के आला अधिकारी और राष्ट्रमंडल खेल महासंघ के अध्यक्ष माइक फ़ेनेल भी शामिल हैं.

खेलों के दौरान इस दल की रोज़ एक बैठक होगी. खेलों के दूसरे दिन तक की अपनी जांच रिपोर्ट के बाद इस दल के लिए आगे की राह मुश्किल भरी हो सकती है.

मुख्य विंदु

इंडियन एक्सप्रेस अख़बार ने उन मुख्य बिंदुओं का भी उल्लेख किया है जिनको पिछली बैठक में उठाया गया था:

* खेलों के लिए अनुबंधित बस ड्राइवरों के कई ऐसे मामले सामने आए हैं. ख़राब भोजन और सुविधाओं की कमी के चलते ये ड्राइवर या तो इस्तीफ़ा दे रहे हैं या फिर हड़ताल पर जा रहे हैं.

*आयोजन समिति को कई ऐसे ईमेल मिले हैं जिनमे कर्मचारियों या स्वंयसेवकों ने रोज़ मिल रहे ख़राब भोजन के विरोध में खेलों से नाता तोड़ने की बात की है. भोजन मुहैया कराने वाले ठेकेदोर भी अपने कर्मचारियों को काम छोड़ कर जाने से रोकने में विफल रहे हैं. ज़्यादातर आयोजन स्थलों पर स्थिति सुधरने में समय भी बहुत लग रहा है.

* राष्ट्रमंडल खेलों के लिए तैयार की गई परिवहन रूपरेखा ख़स्ता हाल में है. "खेलों के लिए चलाई जा रही विशेष बसों के लिए पर्याप्त चालक नहीं हैं और बहुत से ड्राइवर ऐसे हैं जिन्हें या तो दिल्ली के रास्ते पता नहीं हैं या फिर उन्हें अंग्रेज़ी भाषा का ज्ञान नहीं है. बसों के चालक नियमित तौर पर रास्ते भूल जाते हैं जिससे आधे घंटे का सफ़र तीन घंटे तक खिंच जाता है."

अखब़ार के हवाले से ये भी पता चलता है कि पहले इस बात पर सहमति बनी थी कि आयोजन स्थलों पर प्रवेश के लिए सुरक्षा जांच का काम दिल्ली पुलिस संभालेगी जबकि इन स्थलों के भीतर की सुरक्षा आयोजन समिति के ज़िम्मे होगी, जिसमें दिल्ली पुलिस का सीमित सहयोग मिलेगा.

जांच समिति ने पाया है कि इन प्रावधानों का पूरी तरह से पालन नहीं किया जा रहा है.

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