चीनी विद्रोही को नोबेल शांति पुरस्कार

Image caption लू श्याबाओ इस समय चीन के जेल में 11 साल की सज़ा काट रहे हैं.

चीनी नीतियों के ख़िलाफ़ आवाज़ बुलंद करने वाले लू श्याबाओ को नोबेल शांति पुरस्कार का विजेता घोषित किया गया है.

लू श्याबाओ चीन के जेल में 11 साल की सज़ा काट रहे हैं.

ऑस्लो में नोबेल समिति का कहना था कि लू श्याबाओ 20 सालों से मौलिक मानवाधिकारों के लिए लड़ते रहे हैं.

चीन में उनकी गिरफ़्तारी एक ऐसा दस्तावेज़ लिखने के लिए हुई थी जिसमें उन्होंने मानवाधिकारों की बेहतरी और राजनीतिक सुधारों की मांग की थी.

चीन की सरकार ने इस पुरस्कार की घोषणा से पहले ही अपना लिखित विरोध प्रकट कर दिया है.

चीन अपने देश के विद्रोहियों को पुरस्कार देने के ख़िलाफ़ नार्वे स्थित नोबेल समिति को लगातार ये कहकर चेतावनी देता रहा है कि ये नोबेल शांति पुरस्कार के सिद्धांतों के ख़िलाफ़ होगा और इससे नार्वे और चीन के रिश्तों पर असर पड़ेगा.

नोबेल समिति नार्वे की सरकार के अधिकारक्षेत्र से अलग है और उनका कहना है कि वो किसी पक्ष के दबाव से नहीं प्रभावित होते.

साल 1989 में भी जब उन्होंने बौद्ध धार्मिक गुरू दलाई लामा को नोबेल शांति पुरस्कार दिया था तो चीन ने उसकी कड़ी आलोचना की थी.

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