बचाव के दौरान ब्रितानी बंधक की मौत

  • 9 अक्तूबर 2010
लिंडा नोरग्रोव
Image caption लिंडा नोरग्रोव कई सालों से अफ़ग़ानिस्तान में काम कर रही थीं और इलाके में मौजूद ख़तरों से वाक़िफ़ थी

अफ़ग़ानिस्तान में दो हफ़्ते पहले बंधक बनाई गई ब्रितानी सहायताकर्मी बचाव अभियान के दौरान मारी गई हैं.

शुक्रवार की रात अपहरणकर्ताओं से छुड़वाने के लिए चलाए गए अमरीकी सेना के अभियान के दौरान स्कॉटलैंड की लिंडा नौरग्रोव की मौत हुई.

पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान के कुनार प्रांत में ब्रितानी और अफ़ग़ानिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसियों के अलावा और भी कई गुप्तचर सेवाएं लिंडा की तलाश कर रही थीं.

पता चला है कि लिंडा नरोग्रोव को बंधक बनाकर उनके अपहरणकर्ता एक गांव से दूसरे गांव ले जाते रहे.

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री औऱ विदेशमंत्री को बराबर इस तलाश अभियान की सारी जानकारी दी जा रही थी.

शुक्रवार की रात लिंडा नौरग्रोव को बचाने के लिए ये अभियान ब्रितानी सरकार की अनुमति से ही चलाया गया था.

हालांकि अभियान अमरीकी सैनिक चला रहे थे लेकिन ब्रितानी अधिकारी इसमें सलाहकार की भूमिका निभा रहे थे.

ब्रिटेन के विदेश मंत्री विलियम हेग ने कहा है, "इस दुखद मौत के ज़िम्मेदार पूरी तरह से अपहरणकर्ता हैं. जिस पल हमें इस अपहरण के बारे में पता चला, तभी हम समझ गए थे कि लिंडा की जान को ख़तरा है. इन सभी बातों को देखते हुए हमारी शुरू से यही राय थी कि उनकी जान बचाने के लिए अभियान चलाना होगा."

क़ाबुल में मौजूद बीबीसी संवाददाता निकोलस विचैल के मुताबिक ऐसा लगता है कि लिंडा नौरग्रोव की मौत उनके अपहरणकर्ताओं के हाथों ही हुई है.

लिंडा नौरग्रोव पिछले कई सालों से अफ़ग़ानिस्तान में एक अमरीकी संस्था डीएआई के लिए काम कर रही थी.

बाईस सितंबर को तीन अन्य अफ़ग़ानिस्तानी सहयोगियों के साथ लिंडा नौरग्रोव का अपहरण हुआ था.

लेकिन बाद में उन तीनो को बिना कोई नुक़सान पहुंचाए छोड़ दिया गया था.

क़ाबुल में उनके एक सहयोगी का कहना था कि लिंडा ने अफ़गा़निस्तान के लिए अपनी जान दे दी.

नैटो अभियान

उधर, अफ़ग़ानिस्तान के पश्चिमी इलाक़े में हुए चरमपंथी हमले में इटली के चार सैनिक मारे गए हैं.

इटली के सेना का कहना है कि पश्चिमी प्रांत फ़राह की गुलिस्तां घाटी में चरमपंथियों के साथ हुई झड़पों में ये चार सैनिक मारे गए औऱ एक घायल हो गया.

अफ़ग़ानिस्तान में नैटो के नेतृत्व वाली अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा सेना में इटली के लगभग साढ़े तीन हज़ार सैनिक तैनात हैं. और इस साल के अंत तक इनकी संख्या चार हज़ार हो जाने की संभावना है.

पिछले छह सालों में इटली के 34 सैनिक मारे गए हैं.

इटली के प्रधानमंत्री सिल्वियो बर्लुस्कोनी ने कहा है कि उन्हें इस ख़बर पर बेहद अफ़सोस हुआ है.

उनका कहना था, "हम इस बात के लिए इटली के सैनिकों के आभारी हैं कि दुनिया भर में वे हर तरह के आतंकवाद के ख़िलाफ़ और शांति अभियानों के समर्थन में अभियान चलाकर अपनी अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को निभाते हैं."

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