इंडोनेशियन 'प्लेबॉय' के संपादक गिरफ्तार

  • 9 अक्तूबर 2010
एरविन अर्नादा
Image caption दो साल की सज़ा काटने के लिए एरविन अर्नादा को बाली से गिरफ़्तार करके लाया गया

'इंडोनिशियन प्लेबॉय' के पूर्व संपादक एरविन अर्नादा को अश्लील प्रकाशन के आरोप में गिरफ़्तार कर लिया गया है.

एरविन अर्नादा अगस्त से ही अदालत के आदेश की अवहेलना कर रहे थे, जब उन्हें अश्लील प्रकाशन के आरोपों मे दो साल की जेल की सज़ा सुनाई गई थी.

वयस्कों की पत्रिका प्लेबॉय के पूर्व संपादक एरविन अर्नादा को पुलिस ने बाली द्वीप से गिरफ्तार किया गया है.

अश्लील प्रकाशन के आरोप मे दोषी घोषित किए जाने के बाद उन्होंने ख़ुद को अदालत को नहीं सौपने का फ़ैसला कर लिया था.

इस्लामिक डिफ़ैंडर्स फ्रंट यानि एफ़पीआई नाम के एक कट्टरपंथी मुसलिम गुट ने एरविन अर्नादा को एक ‘नैतिक आंतकवादी’ घोषित कर दिया था.

एफ़पीआई ने अर्नादा को पकड़ पाने में अधिकारियों की नाक़ामी की भी जमकर निंदा की थी.

एरविन अर्नादा पर सबसे पहले 2007 में मुक़दमा चला था लेकिन तब उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया गया था.

लेकिन एफ़पीआई और अन्य मुस्लिम गुटों ने मिलकर सुप्रीम कोर्ट में 'प्लेबॉय' पत्रिका के संपादक के ख़िलाफ़ एक अपील दायर की थी.

इस अपील के तहत सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अश्लील प्रकाशन का दोषी पाया.

सन 2006 में इस्लामिक गुटों ने 'इंडोनेशियन प्लेबॉय' पत्रिका को, उसके कुछ ही संस्करण छपने के बाद ही बंद करवा दिया था.

लेकिन सन 2007 में एरविन अर्नादा को अदालत से मिली राहत को इंडोनेशियाई प्रेस की आज़ादी की जीत के रूप में देखा गया.

दक्षिणी जकार्ता के प्रमुख सरकारी वकील मोहम्मद युसुफ़ ने कहा है कि अर्नादा खुद को सौंपने के पिछले तीन आदेशों की अवहेलना कर चुके हैं.

प्रमुख सरकारी वकील युसुफ़ का कहना था कि “इस मामले में एफ़पीआई के दबाव पर हमें कारर्वाई करनी पड़ रही है.”

हिंसक प्रदर्शन

उल्लेखनीय है कि दुनिया की सबसे ज़्यादा मुसdलिम आबादी वाले देश इंडोनेशिया में जब सन 2006 में प्लेबॉय पत्रिका पहली बार प्रकाशित हुई थी, तब देश भर मे इस्लामिक कट्टरवादियों ने हिंसक विरोध प्रर्दशन किए थे,

इंडोनेशिया सरकार ने इस्लामिक गुटों के समर्थन से सन 2008 में पोर्नोग्राफ़ी के ख़िलाफ़ एक विवादित विधेयक पारित कर दिया था. था.

लेकिन इस विधेयक के पारित होते ही देश भर में, ख़ासतौर पर हिंदू बहुल बाली द्वीप में, विरोध प्रदर्शनों का सिलिसिला भी शुरू हो गया था.

विधेयक के विरोधियों का कहना है कि इस के तहत नाभि, कूल्हे या जंघा के प्रदर्शन के नाम पर किसी के भी ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई की जा सकेगी.