नेल्सन मंडेला की चिट्ठियाँ

नेलसन मंडेला
Image caption नेलसन मंडेला ने नस्लभेद के खि़लाफ़ दक्षिण अफ्रीका में लम्बा संघर्ष किया था

दक्षिणी अफ़्रीका के पूर्व राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला के क़ैद के दौरान लिखी गई चिट्ठियों का एक संग्रह इस हफ़्ते प्रकाशित हो रहा है.

‘कनवरसेशन विद माइसेल्फ़’ नाम की इस किताब में वे ख़त शामिल हैं जो नेल्सन मंडेला ने अपने 27 साल की क़ैद के दौरान लिखी थी.

ये ख़त उनकी उस वेदना को बयाँ करते हैं जो उन्हें नस्लभेदी सरकार से जूझ रहे देश में अपने परिवार से अलग होने पर हुई थी.

वो एक चिट्ठी में लिखते हैं कि उन्हें बेहद क्षोभ है कि वह अपने परिवार की मदद करने की स्थिति में नहीं हैं.

जब उनकी पत्नी विन्नी मंडेला वर्ष 1970 में प्रेटोरिया में कालकोठरी में कैद थीं तो उन्होंने लिखा, “मैं इस बात से बहुत गमज़दा हूँ, मेरे जिस्म का गोश्त, धमनियाँ और मेरी आत्मा को क्षोभ है कि तुम्हारी कठिन परीक्षा की घड़ी में मैं इतना बेबस हूँ कि तुम्हारी कोई मदद नहीं कर सकता.”

लगभग इसी समय नेल्सन मंडेला अपनी बेटियों को कहते हैं, “तुम्हारी माँ को एक बार फिर गिरफ़्तार कर लिया गया है और तुम्हारे माता-पिता दोनों जेल में हैं. लम्बे समय तक तुम्हें अपने घर से दूर यतीमों की तरह रहना पड़ेगा, तुम्हें माँ-बाप का प्यार नहीं मिल पाएगा, अब क्रिसमस या तुम्हारे जन्मदिन पर कोई पार्टी नहीं होगी, न तुम्हें उपहार मिलेंगें, न कपड़े, न जूते और न खिलौने.”

सत्ताईस साल की क़ैद के दौरान लिखी गई इन चिट्ठियों में से कुछ को अफ़्रीकी नेता ने एक कॉपी में भी लिख रखा था, जिसे जेल अधिकारियों ने ज़ब्त कर लिया था.

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