नोबेल पुरस्कार का विवाद और गहराया

Image caption लू श्याबाओ ने अपना पुरस्कार थ्येन आन मन चौक के 'शहीदों' के नाम कर दिया है

चीन की राजधानी बीजिंग में नॉर्वे के दूतावास ने बताया है कि चीन के साथ होने वाली एक मंत्री स्तरीय बैठक रद्द कर दी गई है.

मछली पकड़ने के मामले पर सहयोग बढ़ाने के मुद्दे पर यह बैठक बुधवार को होनी थी, इस बैठक को रद्द किए जाने का कोई कारण नहीं बताया गया है.

नोबेल पुरस्कार समिति का दफ़्तर नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में है लेकिन नोबेल समिति नॉर्वे की सरकार के नियंत्रण से बाहर है, नोबेल पुरस्कार समिति कह चुकी है कि वह अपने निर्णय किसी के दबाव में नहीं करेगी.

तिब्बती धर्मगुरू दलाई लामा ने मानवाधिकार कार्यकर्ता लू श्याबाओ को नोबेल पुरस्कार दिए जाने पर चीन के विरोध को ग़लत ठहराया है.

निर्वासन में भारत में रहने वाले दलाई लामा ने कहा, "चीन अलग तरह के विचारों का सम्मान नहीं करता है."

एक जापानी समाचार पत्र को दिए गए इंटरव्यू में दलाई लामा ने कहा कि "अगर चीन एक खुले समाज का निर्माण करता है तभी सबका भला हो सकता है."

पत्नी भी नज़रबंद

इस बीच लू श्याबाओ की पत्नी को भी नज़रबंद कर दिया गया है जबकि श्याबाओ ख़ुद चीन की जेल में बंद हैं, उन्होंने नोबेल पुरस्कार थ्येन आन मन चौक की गोलीबारी मारे गए 'शहीदों के नाम' कर दिया है.

श्याबाओ की पत्नी लू च्याई के वकील ने कहा है कि उनसे संपर्क करना संभव नहीं हो पा रहा है क्योंकि उनके घर का फ़ोन काट दिया गया है और उनके घर के बाहर मौजूद पत्रकारों को उनसे बात करने की अनुमति नहीं है.

चीन ने श्याबाओ को नोबेल पुरस्कार दिए जाने की कड़ी आलोचना करते हुए कहा है कि "यह नोबेल सम्मान के मूल सिद्धांतों के विपरीत निर्णय है".

नामांकन की ख़बर आने के बाद ही चीन ने नॉर्वे के राजदूत को बुलाकर चेतावनी दी थी कि अगर श्याबाओ को नोबेल पुरस्कार दिया गया तो इससे दोनों देशों के संबंध ख़राब हो सकते हैं.

श्याबाओ को 2009 में ग्यारह वर्ष के कारावास की सज़ा सुनाई गई थी, उन पर देश में विद्रोह भड़काने की कोशिश करने का आरोप लगाया गया है.

चीन की सरकार ने कई मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की आवाजाही पर रोक लगाई है और देश में नोबेल पुरस्कार के बारे में किसी तरह के इंटरनेट चैट पर पाबंदी लगा दी गई है.

तिब्बती धर्मगुरू दलाई लामा को नोबेल पुरस्कार दिए जाने पर भी चीन ने कड़ा एतराज़ जताया था.

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