दो के अलावा सभी खनिक घर गए

  • 16 अक्तूबर 2010
बाहर निकला खनिक

चिली में तांबे और सोने के खदान में 69 दिन फँसे रहने के बाद बाहर निकले 33 खनिकों में से 12 ने एक प्रार्थना सभा में हिस्सा लेकर अपने सकुशल बच जाने के लिए कृतज्ञता ज्ञापित की है.

इन खनिकों की वापसी की ख़ुशी में यह आयोजन उसी सैन होज़े खदान के मुहाने पर किया गया था जहाँ खनिक फँसे थे.

हालांकि ये खनिक मीडिया पर दखलंदाज़ी के आरोप लगा रहे हैं लेकिन फिर भी जब में कैंप में पहुँचे तो मीडिया ने उन्हें घेर लिया.

डॉक्टरों का कहना है कि एक को छोड़कर शेष सभी खनिकों का स्वास्थ्य ठीक है. एक खनिक अभी भी अस्पताल में है.

आयोजन

Image caption खनिकों ने मीडिया से उनकी निजता बचाए रखने की अपील की है

इस सामूहिक प्रार्थना सभा का आयोजन एक इवांजेलिकल पादरी और एक रोमन कैथोलिक पादरी ने मिलकर किया था.

इस सभा में उन लोगों में से कुछ लोगों ने भी हिस्सा लिया जो गत बुधवार को खनिकों को बचाए जाने वाले अभियान का हिस्सा थे.

बचाए गए खनिकों में से कुछ की आस्था तो पहले से ही ईश्वर पर थी लेकिन बहुत से लोगों ने कहा कि इस घटना के बाद से वे ख़ुद को ईश्वर के ज़्यादा क़रीब मानने लगे हैं.

हालांकि इस आयोजन को एक निजी आयोजन की तरह रखा गया था लेकिन फिर भी पत्रकार वहाँ पहुँच गए थे.

ऐसे कुछ खनिक जो उस खदान में नहीं फँसे थे ये शिकायत करते देखे गए कि उन्हें प्रार्थना सभा में हिस्सा नहीं लेने दिया गया.

वहीं कुछ 50 लोगों ने ये शिकायत करते हुए विरोध प्रदर्शन किया कि पाँच अगस्त को खदान घँसकने के बाद से उन्हें कोई काम नहीं मिला है.

प्रदर्शनकारियों में से कुछ सैन होज़े खदान में ही काम करते थे.

मानसिक आघात

इस बीच खनिकों को मनोचिकित्सकों की ओर से लगातार सहायता उपलब्ध करवाई गई है.

डॉक्टर मानते हैं कि ऐसा करना उचित है.

डॉ डियाज़ कहते हैं, "वो खनिकों का एक दल था जो निहायत सामान्य लोग थे. ऐसा नहीं है कि बहुत से आवेदनों में से इन लोगों को अंतरिक्षयात्री बनने के लिए छाँटकर रखा गया हो."

उनका कहना है, "हो सकता है कि जो खनिक 69 दिनों तक खदान के भीतर फँसें रहे उनमें कभी भी मनोरोग के लक्षण दिखने लगें."

इस बीच खनिकों ने शनिवार से गहरे रंगों वाले अपने चश्मे उतारने शुरु किए.

खनिकों ने किताब और एक फ़िल्म के लिए अपने कटु अनुभवों में से कुछ को ज़ाहिर करने का समझौता भी किया है.

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