बीबीसी में अहम बदलाव, फ़ंडिंग प्रक्रिया बदली

ब्रिटेन सरकार ने घोषणा है कि बीबीसी वर्ल्ड सर्विस को जिस तरह पैसा दिया जाता है, अब वो प्रक्रिया बदलने जा रही है. ये ब्रिटेन में सार्वजनिक स्तर पर हो रही कटौती का हिस्सा है.

वर्ल्ड सर्विस का सालाना 40 करोड़ डॉलर का बजट अब तक विदेश मंत्रालय की ओर से आता रहा है पर अब यही पैसा बीबीसी के घरेलू बजट से आएगा. यानी उस लाइसेंस फ़ीस के ज़रिए जो ब्रिटेन में टीवी सेट रखने वाले लोगों पर लगाई जाती है.

मतलब ये कि वर्ल्ड सर्विस और बीबीसी मॉनिटरिंग की फ़ंडिंग अब बीबीसी करेगा. इस बारे में औपचारिक घोषणा आज होगी.

जानकारी के मुताबिक बीबीसी लाइसेंस फ़ीस अगले छह साल तक के लिए अपने वर्तमान स्तर पर ही रहेगी. ये फ़ीस 145.50 पाउंड होगी. इन सारे फ़ैसलों का बीबीसी के भविष्य पर गहरा असर पड़ेगा.

वर्ल्ड सर्विस के पूर्व प्रबंध निदेशक जॉन टूसा का कहना है कि ये बहुत ज़रूरी है कि वर्ल्ड सर्विस को बीबीसी में होने वाली पैसों की कटौती से बचाया जाए.

उनका कहना है कि घरेलू बीबीसी को ये समझना होगा कि वर्ल्ड सर्विस विश्व भर में सबसे भरोसेमंद प्रसारक है.

बदलाव के मायने

बीबीसी के राजनीतिक मामलों के संपादक निक रॉबिन्सन का कहना है कि पिछले कुछ महीनों से सरकार बीबीसी को संकेत देती रही है कि वो खर्च में कटौती की प्रक्रिया से अलग नहीं रह सकती.

निक रॉबिन्सन के मुताबिक अब लोग ये समझने की कोशिश कर रहे हैं कि बजट में 16 फ़ीसदी की कटौती का कर्मचारियों और कार्यक्रमों पर क्या असर पड़ने वाला है.

बीबीसी के मीडिया संवाददाता टॉरिन डगलस का कहना है कि ये बीबीसी के लिए अहम बदलाव हैं. बीबीसी को अब अगले छह वर्षों के लिए अपनी आमदनी पता है लेकिन ये आमदनी फ़्रीज़ कर दी गई है या कहें कि एक तय राशि से ज़्यादा नहीं होगी.

जबकि बीबीसी का खर्चा बढ़ गया है क्योंकि वो वर्ल्ड सर्विस और वेल्श चैनल का खर्च उठाएगी.

वर्ल्ड सर्विस पर अभी 27 करोड़ 20 लाख पाउंड का खर्चा होता है. अब नए समझौते के तहत वो ज़्यादा स्वतंत्र तरीके से काम कर पाएगी लेकिन साथ साथ वर्ल्ड सर्विस अब ऐसे बीबीसी का हिस्सा भी होगी जहाँ खर्चों में और कटौती की ज़रूरत है.

सरकार ने बीबीसी को पहले ये प्रस्ताव दिया था कि वो ब्रिटेन में बूढ़े लोगों को मुफ़्त टीवी लाइसेंस देने के लिए होने वाला 60 करोड़ पाउंड का खर्च उठाए. जिसका मतलब होता कि बजट में एक चौथाई की कटौती.

लेकिन जब बीबीसी ने इस पर विरोध जताया तो मंत्रियों ने ये प्रस्ताव रखा कि वर्ल्ड सर्विस का खर्चा चलाने का ज़िम्मा विदेश मंत्रालय के बजाए बीबीसी उठाए, वेल्श चैनल एस4सी भी चलाए और लाइसेंस फ़ीस की कीमत में बढ़ोतरी पर लगी रोक दो साल से बढ़ाकर छह साल करे.

बीबीसी ने अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. कुछ मंत्रियों का कहना है कि बीबीसी के बढ़े हुए खर्चे अब काबू में आएँगे.

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