सऊदी अरब को 60 अरब डॉलर के हथियार

अमरीकी अधिकारियों ने पुष्टि की है कि सऊदी अरब को 60 अरब डॉलर के हथियार बेचने की योजना है जिसमें हेलिकॉप्टर और जेट शामिल हैं.

विदेश मंत्रालय के मुताबिक इस बात की जानकारी कांग्रेस को दे दी गई है जो तीस दिन के अंदर-अंदर इस पर एतराज़ जता सकती है.

अगर ये योजना लागू होती है तो अमरीकी इतिहास में हथियारों से जुड़ा ये सबसे बड़ा समझौता होगा और इससे 75 हज़ार लोगों को नौकरी मिलेगी.

ये भी बताया गया है कि उम्मीद है कि इसराइल इस पर आपत्ति नहीं जताएगा. आमतौर पर इसराइल अरब देशों के साथ हथियार संबंधी समझौतों के पक्ष में नहीं रहा है.

इस योजना के बारे में अमरीकी अधिकारी एंड्रयू शापरियो ने बताया कि क्षेत्रीय रणनीतिक नज़रिए से ये समझौता काफ़ी अहम है.

उन्होंने कहा, “ये सौदा क्षेत्र के अन्य देशों को संदेश देगा कि हम मध्य पू्र्व और अरब की खाड़ी में अपने साझीदार देशों की सुरक्षा के प्रति वचनबद्ध हैं.”

बड़ा सौदा

विशेषज्ञों के मुताबिक इस बिक्री को लेकर कांग्रेस में विरोध नहीं होगा. सौदे में ब्लैक हॉक, लिटल बर्ड हेलीकॉप्टर, एफ़-15 लड़ाकू विमान शामिल हैं.

इस योजना की जानकारी पिछले महीने लीक हो गई थी जब अधिकारियों ने कहा था कि रडार निरोधक मिसाइलें, बम और हेलफ़ाइल मिसाइलें भी सौदे में रहेंगी.

लेकिन बुधवार को हुई पत्रकार वार्ता में मिसाइलों का ज़िक्र नहीं किया गया है.पेंटगान के मुताबिक पहले सऊदी अरब को 30 अरब डॉलर धनराशि के हथियार चुनने थे. माना जा रहा है कि ये सब हथियार 15 से 20 सालों में दिए जाएंगे.

विकासशील देशों में सबसे ज़्यादा हथियार खरीदने वाले देशों में सऊदी अरब का भी नाम है.

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