चीन की आर्थिक रफ़्तार में कमी

  • 21 अक्तूबर 2010
Image caption चीन में मंहगाई में भारी तेज़ी आई है.

चीन का कहना है कि उनकी अर्थव्यवस्था मज़बूती से आगे बढ़ रही है लेकिन साल की तीसरी तिमाही में वृद्धि की दर में कमी आई है.

माना जा रहा है मकानों की बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण और कर्ज़ के लेन-देन पर कसते लगाम की वजह से ये कमी आई है.

आधिकारिक जानकारी के अनुसार सितंबर के महीने में उपभोक्ता मूल्यों में पिछले दो सालों में सबसे ज़्यादा तेज़ी देखी गई यानि चीज़ें ख़ासी मंहगी हुईं.

यही वजह है कि चीन ने इस हफ़्ते 2007 के बाद पहली बार ब्याज दरों में वृद्धि की है.

बीजिंग से बीबीसी संवाददाता क्रिस हॉग का कहना है कि अर्थव्यवस्था धीमी हुई है क्योंकि सरकार ने कर्ज़ों के लेन-देन पर अंकुश लगाया है और कोशिश की है कि वृद्धि ऐसी हो जो लंबे समय तक जारी रहे.

अभी भी पिछले तीन महीनों में चीन के सकल घरेलू उत्पाद के बढ़ने की दर दुनिया की सभी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से ज़्यादा है.

मंहगाई

लेकिन वृद्धि दर में आई इस कमी से विश्व अर्थव्यवस्था को उबारने में जो सहयोग चीन कर सकता था उसे झटका लगेगा.

साथ ही चीन में तेल, लौह अयस्क, फ़ैक्ट्री की मशीनों और दूसरे आयातों में कमी आएगी.

नीति निर्धारकों के लिए सबसे बड़ी चिंता बढ़ती मंहगाई है.

पिछले महीने उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में अपेक्षा से ज़्यादा तेज़ी आई. खाद्य पदार्थों की कीमतों में छह प्रतिशत से भी ज़्यादा की बढ़ोतरी हुई.

चीन का ग़रीब वर्ग आज अपनी आय का सबसे बड़ा हिस्सा खाद्य सामग्री पर खर्च कर रहा है.

सरकार ने इस हफ़्ते ब्याज दर में बढ़ोतरी करके सबको चौंका दिया है लेकिन इससे मंहगाई में कमी आ सकती है.

आंकड़े कहते हैं कि इस साल की फसल बुरी नहीं है और उससे खाने-पीने की चीज़ों की कीमतें कम हो सकती हैं.

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