फ्रांस में नाकेबंदी जबरन खत्म कराई गई

Image caption पुलिस ने बल प्रयोग करके नाकेबंदी ख़त्म की

फ्रांस की एक बड़ी पेट्रोल रिफ़ाइनरी के बाहर पुलिस और उग्र प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ है, हड़ताल कर रहे कर्मचारियों ने दस दिन से इस रिफ़ाइनरी के सभी रास्ते बंद कर दिए थे.

शुक्रवार की सुबह पुलिस ने बल प्रयोग करके हड़ताली कर्मचारियों की नाकेबंदी को तोड़ दिया है. पेरिस के निकट स्थित ग्रांपुई रिफ़ाइनरी उन 12 तेलशोधक कारखानों में है जहाँ हड़ताल चल रही है.

तेल कर्मचारियों की हड़ताल की वजह से फ्रांस में तेल की भारी किल्लत हो गई है जिसके बाद राषट्रपति निकोला सार्कोज़ी को मामले में हस्तक्षेप करते हुए नाकेबंदी को बलपूर्वक तोड़ने का आदेश पड़ा.

सुबह के तीन बजे लगभग 100 दंगा निरोधक पुलिसकर्मियों ने ज़बरदस्ती नाकेबंदी तोड़ दी. टकराव में घायल हुए एक व्यक्ति को तत्काल एंबुलेंस से अस्पताल ले जाया गया.

ग्रांपुई रिफ़ाइनरी से ही पेरिस के तेल डिपुओं और हवाई अड्डों के लिए ईंधन की सप्लाई होती है, इस रिफ़ाइनरी से दस दिन से तेल बाहर निकलना बंद हो गया था. ग्रांपुई रिफ़ाइनरी के दरवाज़े खुलने से राजधानी पेरिस में तेल सप्लाई की स्थिति बेहतर होने के आसार हैं लेकिन अभी तो स्थिति ये है कि लगभग ढाई हज़ार पेट्रोल स्टेशनों में एक बूंद भी तेल नहीं है.

कई संयंत्रों में चल रही हड़ताल की वजह से तेलशोधन का काम भी बुरी तरह बाधित हुआ है. फ्रांस में पिछले कई दिनों से पेंशन के नियमों में परिवर्तन और रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने को लेकर ज़ोरदार विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं.

परिवर्तन के प्रयास

फ्रांसीसी संसद में पेंशन सुधार बिल पर आज ही मतदान हो रहा है. सरकार ने जल्दी निर्णय लेने की मंशा के साथ एकमुश्त बिल संसद में पेश किया है जिसके पारित होते ही पेंशन और रिटायरमेंट के नियमों ढेर सारे सुधारों की अनुमति मिल जाएगी.

फ्रांसीसी मंत्रियों का कहना है कि बिल के पारित होने के बाद पेंशन के नियमों में परिवर्तन आसान हो जाएगा. फ्रांसीसी सरकार और मज़दूर यूनियनों के बीच कई दिनों से गतिरोध बना हुआ है और दोनों में से कोई पक्ष झुकने को तैयार नहीं दिख रहा है.

हड़ताली मज़दूरों ने रिफ़ाइनरियों के बाहर नाकेबंदी करके तेल की सप्लाई को पूरी तरह ठप कर दिया है. तेल की किल्लत सरकार को सबसे अधिक चिंतित कर रही है लेकिन फ्रांस में आम जनजीवन का हर क्षेत्र इन हड़तालों से बुरी तरह प्रभावित हुआ है.

मज़दूर संगठनों ने साफ़ कह दिया है कि वे बिल के पारित होने के बाद भी अपना प्रदर्शन जारी रखेंगे, उन्होंने छह नवंबर को भी आम हड़ताल की घोषणा की है. ग्रांपुई के अलावा दक्षिणी शहर तुलुज़ में भी पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तेल के एक डिपो से हटाने के लिए आँसू गैस का इस्तेमाल किया.

देश के एक अन्य प्रमुख शहर लियों सैकड़ों की संख्या में दंगा निरोधक पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं. विरोध मुख्य रूप से फ्रांस में रिटायरमेंट की उम्र को 60 वर्ष से बढ़ाकर 62 वर्ष करने के मुद्दे पर हो रहा है.

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