विकीलीक्स अख़बारों की सुर्ख़ियों में

  • 23 अक्तूबर 2010
विकीलीक्स
Image caption विकीलीक्स ने हाल में अफ़गानिस्तान युद्ध से संबंधित ख़ुफ़िया दस्तावेज़ प्रकाशित किए थे

विकीलीक्स ने अमरीका और यूरोप के सात मीडिया समूहों को इराक़ युद्ध में अमरीका सेनाओं की पिछले पांच सालों की कार्रवाई के ख़ुफ़िया दस्तावेज़ ख़ुद प्रकाशित करने से पहले ही भेज दिए थे.

इन अख़बारों में अमरीकी अख़बार न्यूयॉर्क टाइम्स, ब्रिटेन का द गार्डियन और जर्मनी का डर श्पायगेल शामिल हैं. इन अख़बारों में शनिवार को विकीलीक्स के ज़रिए इराक़ में हुई सैन्य कार्रवाई के गुप्त दस्तावेज़ो के कई अहम पहलुओं को छापा गया है.

द गार्डियन ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि किस प्रकार इराक़ में अमरीकी सैनिक जनरलों को बात की पूरी जानकारी थी कि अमरीकी सैनिक ग़िरफ़्तार किए गए लोगों को यातना देने के कैसे-कैसे अमानवीय और क्रूर तरीक़े अपना रहे थे और उसके बावजूद इसे रोकने की कोई कोशिश नहीं की गई.

गार्डियन यह भी लिखता है कि इन दस्तावेज़ों में 15 हज़ार ऐसे लोगों की मौतों के रिकार्ड भी हैं जिसके बारे में पहले कोई जानकारी नहीं थी.

वहीं अख़बार के एक विशेष लेख में अमरीकी सेना की सुरक्षा चौकियों पर मारे गए आम लोगों के बारे में विस्तार से चर्चा करते हुए कहा गया है कि कई बार गाड़ियों में सफ़र कर रहे आम नागरिक घबड़ाहट में चौकियों पर नहीं रूकते (अमरीकी सेनाओं के आदेश के बावजूद) थे और सैनिक उन्हें गोलियों से भून देते थे.

तस्वीरें

अख़बार ने ऐसे हादसों की कुछ मार्मिक तस्वीरें भी छापी हैं.

द गार्डियन लिखता है कि वर्ष 2001 से ही अमरीकी सेना ने यह नीति बना ली थी कि उसके अपने सैनिक कम से कम मारे जाएँ इसीलिए थोड़ा भी शक़ होने की स्थिति में ‘संभावित हमलावरों’ को ख़त्म कर दिया जाता था.

वहीं अख़बार ने यह भी लिखा है कि आत्मसमर्पण कर रहे चरमपंथियों को एक हेलिकॉप्टर से गोलाबारी करके मार डाला गया.

उसके मुताबिक़ उस घटना में रॉयटर्स समाचार एजेंसी के दो पत्रकारों को चरमपंथी समझ कर मार दिया गया था.

इंडिपेंडेंट अखबार लिखता है कि इन दस्तावेज़ों की जानकारी से पता चलता है कि इराक युद्ध में मरने वाले आम लोगों की संख्या एक लाख नहीं बल्कि एक लाख बाईस हज़ार के ऊपर है.

अख़बार लिखता है कि इन दस्तावेज़ों की जानकारी का अमरीकी और नैटो फौज की छवि पर घातक असर पड़ेगा.

दावा

न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपने लेख में इस बात पर ज़ोर दिया है कि मरनेवालों की तादाद को लेकर अमरीकी प्रशासन का दावा झूठ साबित हो गया है.

Image caption विकीलीक्स के संस्थापक जुलियन असांजे के खिलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई शुरू करने के साथ चेतावनी भी दी गई है

अमरीकी प्रशासन कहता रहा कि उसके पास युद्ध में मरने वालों की कोई सटीक जानकारी नहीं है और ग़ैर सरकारी संगठन इराक बॉ़डी काउंट का एक लाख से ज़्यादा मौतों का दावा अतिशयोक्ति है.

न्यूयॉर्क टाइम्स ने दस्तावेज़ों की उस जानकारी पर भी बल दिया है जिसमें कहा गया है कि अमरीकी सेना को मालूम था कि ईरान इराक़ी शिया मिलिशिया को व्यापक सैनिक सहायता दे रहा था.

अख़बार के माइकल गार्डन ने बीबीसी को बताया, "इस लीक की सबसे विशेष बात यह है कि इन दस्तावेज़ों को जुटाने और हासिल करने के लिए कितने बड़े स्तर पर कोशिश करनी पड़ी होगी. और दूसरी चौंकाने वाली बात यह है कि इराक़ में यह कार्रवाई राष्ट्रपति ओबामा के पद संभालने के एक साल तक चलती रहीं. और इसी दौरान नया अमरीकी प्रशासन ईरान से संबंध सुधारने की कोशिश भी कर रहा था."

जर्मन अखबार डर श्पायगल लिखता है कि ये दस्तावेज़ इतना विस्तृत है कि इराक़ युद्ध का इतिहास लिखा जा सकता है.

अख़बार में इस बात पर भी विशेष ज़ोर है कि क्या अमरीकी प्रशासन की यह आलोचना सही है कि विकीलीक्स की ओर से प्रकाशित दस्तावेज़ अमरीकी और नैटो सैनिकों की ज़िदगी ख़तरे में डाल सकते हैं क्योंकि इनमें उनके काम करने के तरीके़, हथियारों की विस्तृत जानकारी है जिसका चरमपंथी फ़ायदा उठा सकते है?

अख़बार लिखता है कि यह भी पूछना चाहिए कि एक देश का जानकारियों को गुप्त रखना ज़्यादा महत्वपूर्ण है या आम लोगों का उसको जानने का हक़?

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