सैंकड़ों अभी भी लापता, राहत लेकर जहाज़ पहुंचा

Image caption ख़राब मौसम की वजह से राहत कार्य में मुश्किलें आ रही हैं.

इंडोनेशिया में सोमवार को आए भूकंप और सूनामी के बाद सैंकड़ों लोग अभी भी लापता हैं.

इस सूनामी में इंडोनेशिया के मेंतावी द्वीप पर कम से कम 343 लोग मारे जा चुके हैं और 400 लोगों का कोई अता पता नहीं है.

आशंका जताई जा रही है कि ये लोग लहरों की चपेट में आ गए होंगे.

ख़राब मौसम की वजह से बचाव कार्य धीमा हो रहा है लेकिन राहत सामग्री, खाना, पानी और दवा लेकर तीन जहाज़ों का एक दस्ता उस इलाके में पहुंच गया है जहां तबाही हुई है.

इंडोनेशिया के राष्ट्रपति भी प्रभावित इलाकों का दौरा कर रहे हैं.

सुसीलो बांबांग युधोयुनो वियतनाम का दौरा बीच में ही छोड़कर बचाव कार्य की देखरेख के लिए इंडोनेशिया लौटे हैं. वो हेलीकॉप्टर से सुदूरवर्ती मेंतावी द्वीप की ओर रवाना हुए हैं.

राहत कार्य

हवाई तस्वीरों से मेंतावी द्वीप पर हुई तबाही का अंदाज़ा लग पा रहा है. सूनामी से सपाट हो चुके गांव हेलीकॉप्टर से ली गई तस्वीरों में ही दिख पा रहे हैं.

बचाव दल अंतत: उस क्षेत्र में पहुंच पाया है जहां 13 गांव 10 फ़ीट उंची लहरों में बह गए. लेकिन अभी भी 11 गांवों से संपर्क नहीं हो पाया है.

खोजी दलों को समुद्री तट पर और सड़कों के किनारे बिखरी हुई लाशें नज़र आई हैं.

बहुत सारे लोग अभी भी अपनों की तलाश कर रहे हैं लेकिन हर गुज़रते पल के साथ उनके मिलने की उम्मीद ख़त्म हो रही है.

Image caption हवाई तस्वीरों से अंदाज़ा मिलता है कि कैसे कई गांव सपाट हो गए हैं.

अपने पति को दफ़ना कर अपने लापता शिशु की तलाश कर रही 20-वर्षीय चंद्रा का कहना था, “ मैंने मलबे के नीचे देखा, ध्वस्त हुए घरों के नीचे देखा, अस्थाई राहत शिविरों में देखा लेकिन उसका कोई पता नहीं चला.”

उनका कहना था, “मैं जानती हूं वो मर चुका है लेकिन प्रार्थना कर रही हूं कि वो ज़िंदा हो. मैं थक चुकी हूं...दो दिनों से मैने कुछ नहीं खाया है लेकिन मुझे भूख नहीं लगी है.”

चंद्रा और उनके गांव के लोगों को सूनामी की सीधी मार झेलनी पड़ी और उनके पास कोई चेतावनी भी नहीं थी.

इंडोनेशिया के अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि 2004 में आई सूनामी के बाद जो अत्य़ाधुनिक चेतावनी प्रणाली लगाई गई थी वो सोमवार को काम नहीं कर रही थी.

बीबीसी की इंडोनेशियाई सर्विस से बात करते हुए रेड क्रॉस संस्था के प्रमुख ने बताया है कि ख़राब मौसम से राहत कार्य में मुश्किलें आ रही हैं.

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