मुंबई की पहली महिला ट्रेन ड्राइवर

प्रीति कुमारी
Image caption प्रीति कुमारी का एक भाई और एक बहन भी रेलवे में ड्राइवर हैं.

प्रीति कुमारी पश्चिम रेलवे की पहली महिला ड्राइवर हैं. 12 अक्तूबर को प्रीति भारतीय रेलवे की क़रीब बारह महिला चालकों में से एक बन गईं. अब वे मुंबई की लाइफ़लाइन कही जाने वाली शहरी रेल सेवा में ट्रेनें दौड़ा रही हैं.

बिहार के एक छोटे से गांव से आईं प्रीति अपने गांव की पहली महिला हैं जो कामकाज के लिए बाहर निकली हैं. और उन्हें इसपर गर्व है.

प्रीति कहतीं हैं, "अब हर कोई मेरे गांव का नाम जानता है. ये कोई आम बात नहीं."

ये पूछे जाने पर कि उन्हें यहां तक पहुंचने में क्या-क्या दिक्कतें पेश आईं, प्रीति कहती हैं, "अगर ये मुश्किल नहीं होता तो क्या आप मुझसे इंटरव्यू लेनें आतीं? "

मिठाई का डिब्बा

हम मुंबई के बेहद व्यस्त दादर रेलवे स्टेशन पर बैठकर बातचीत कर रहे थे और आते-जाते यात्री प्रीति का अभिवादन कर रहे थे.

प्रीति के पास एक मिठाई का डिब्बा था. वे अभिवादन करने वालों को मिठाई का टुकड़ा थमाते जा रही थीं. प्रीति ने इसकी वजह कुछ यूं बताई, "मैं अपनी ख़ुशी लोगों के साथ बांटना चाहती हूं इसलिए हमेशा अपने साथ एक मिठाई का डिब्बा रखती हूं."

प्रीति बताती हैं कि एक बार कुछ मछुआरनों ने उन्हें ड्राइवर की केबिन में देखते ही नाच-गाना शुरु कर दिया.

प्रीति कहती हैं, "मुझे अन्य चालकों से अधिक मेहनत करनी होगी ताकि कभी कोई ये ना कह सके कि 'वो महिला थी इसलिए गड़बड़ हो गई'."

प्रीति अपने छह से सात घंटों की शिफ़्ट में चार चक्कर लगाती हैं. उन्हें अच्छी तनख़्वाह मिलती, रेलवे का क्वार्टर है और मुफ़्त चिकित्सा सुविधा है. चार भाई-बहनों में सबसे बड़ी हैं प्रीति. उनका एक भाई और छोटी बहन भी रेलवे में ड्राइवर हैं.

प्रीति की बहन दिल्ली मेट्रो में चालक हैं.

अपने कामयाबी का श्रेय अपने माता-पिता को देते हुए प्रीति कहतीं हैं,"मेरी मां और पिताजी हमेशा हमें पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते रहते थे. वे हमें कल्पना चावला का उदाहरण देते हुए बताते थे कि लड़की और लड़के में कोई फ़र्क नहीं होता."

नाइट शिफ़्ट नहीं

प्रीति कुमारी की आदर्श हैं पहली भारतीय ट्रेन ड्राइवर सुरेखा यादव.

प्रीति कहती हैं, "पहली यात्रा से पहले और उसके बाद मैंने उनसे बात की. उन्होंने मेरा ख़ूब हौसला बढ़ाया."

मुंबई की ट्रेनों में भीड़, ट्रेनों के देरी आने या किसी भी विवादित मुद्दे पर प्रीति कोई राय ना देने के प्रति लगातार सजग रहीं.

रेलवे में उनके साथ काम करने वालों ने भी उनका गर्मजोशी से स्वागत किया,"दरअसल मेरे सहयोगियों ने कहा कि लक्ष्मी आई है, अब सब सही हो जाएगा."

रेलवे के प्रवक्ता शरत चंद्रायन कहते हैं कि प्रीति को अन्य ड्राइवरों की ही तरह प्रशिक्षण मिला है लेकिन महिला होने के नाते उन्हें नाइट शिफ़्ट पर नहीं लगाया जाता.

लेकिन फिर भी प्रीति को अपनी सात साल की बच्ची से दूर तो रहना ही पड़ता है. प्रीति ने अपनी बेटी को अपनी मां के पास गांव में छोड़ा हुआ है और कहतीं हैं कि जैसे ही वे मुंबई में अच्छी तरह जम जाएंगी बेटी को अपने पास बुला लेंगीं.

आख़िर में प्रीति ने बताया कि उनका काम कितना चुनौती-भरा है, "हमें ट्रैक पर किसी भी तरह की हरकत पर लगातार नज़र रखनी होती है. अन्य ट्रेनों की आवाजाही, सिग्नल और यात्रियों पर ध्यान रखना होता है. ये आसान नहीं. लेकिन मेरा मानना है कि महिलाओं में हर स्थिति में ढलने की क़ाबिलियत होती है."

प्रीति के पति भारतीय वायुसेना में एक टेक्निशियन हैं जिनका हाल ही में मुंबई तबादला हुआ है.

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