पार्सल बम मामले में छात्रा, उसकी माँ गिरफ़्तार

बरामद उपकरण

यमन से अमरीका जा रहे दो मालवाहक विमानों में दुबई और अमरीका में पार्सल बम पाए जाने के सिलसिले में यमन के प्रशासन ने एक छात्रा और उसकी माँ को राजधानी साना में गिरफ़्तार किया है.

मालवाहक विमानों में पाए गए पैकेट अमरीका के शिकागो में स्थित यहूदियों के दो साईनेगॉग के पते पर भेजे गए थे.

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने कहा है कि उनका मानना है कि जो उपकरण प्रिंटर के कार्ट्रिज में ब्रिटेन में पाया गया, उसका मक़सद विमान को आसमान में विस्फोटक से उड़ाना था.

ब्रिटेन, अमरीका, फ़्रांस और जर्मनी ने इस घटना के बाद यमन से हवाई रास्ते से सामान की आवाजाही पर रोक लगा दी है. शनिवार को यमन के प्रशासन ने 26 अन्य संदिग्ध पैकेट भी कब्ज़े में लिए हैं.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि 'इस कोशिश के बाद यमन से पैदा हुए सुरक्षा के ख़तरों के बारे में डर बढ़ जाएगा जहाँ अल क़ायदा एक कमज़ोर सरकार, देश के जोगराफ़िया और राजनीतिक-सामाजिक-आर्थिक समस्याओं का फ़ायदा उठा रहा है.'

'बहुत ही चुप रहने वाली छात्रा'

यमन के प्रशासन ने मालवाहक कंपनी को दिए गए एक फ़ोन नंबर के ज़रिए गिरफ़्तार की गई छात्रा का पता लगाया और उसे गिरफ़्तार कर राजधानी साना में एक घर में रखा है.

इस यमनी महिला का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है. एक सुरक्षा अधिकारी ने समाचार एजेंसी एएफ़पी को बताया है कि गिरफ़्तार छात्रा मेडिकल की पढ़ाई कर रही हैं और एक पेट्रोलियम इंजीनियर की पुत्री हैं.

Image caption पैकेटों पर यहूदी उपासना स्थलों के पते लिखे थे

गिरफ़्तार छात्रा के वकील ने कहा कि चाहे इस छात्रा की माँ को भी हिरासत में लिया गया है लेकिन वे इस मामले में मुख्य अभियुक्त नहीं हैं.

वकील का कहना था, "छात्रा के जानकारों ने मुझे बताया है कि वह काफ़ी चुप रहने वाली महिला हैं. उनके किसी राजनीतिक या धार्मिक संगठन से संबंध होने की कोई जानकारी नहीं मिली है. मेरी चिंता है कि छात्रा को फँसाया गया है क्योंकि ये समझ में नहीं आता कि जो व्यक्ति ऐसा काम करेगा वह अपनी तस्वीर, पहचान पत्र और फ़ोन नंबर क्यों छोड़ जाएगा?"

'यमन के मामलों में दख़ल न दें'

यमन के राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह ने कहा कि अमरीका और संयुक्त अरब अमीरात ने जो सूचनाएँ उपलब्ध कराईं थीं उनके आधार पर छात्रा को गिरफ़्तार किया गया है.

उनका कहना था, "हमारा देश सहयोगियों के साथ अल क़ायदा के ख़िलाफ़ जंग जारी रखेगा. लेकिन हम ये नहीं चाहते कि अल क़ायदा के ख़िलाफ़ अभियान के नाम पर कोई भी यमन के अंदरूनी मामलों में दख़ल दे."

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने सऊदी अरब के शाह अब्दुल्ला को फ़ोन कर इन पैकटों के बारे में ख़ुफिया सूचना देने के लिए शुक्रिया अदा किया.

राष्ट्रपति ओबामा ने ब्रितानी प्रधानमंत्री डेविड कैमरन को भी फ़ोन किया और ब्रितानी गुप्तचर सेवा की इन विस्फोटकों को निष्क्रिय करने में भूमिका की तारीफ़ की है.

सुरक्षा कड़ी की गई

दूसरी ओर यमन की राजधानी साना की सड़कों पर सशस्त्र सुरक्षा बढ़ा दी गई है और अधिकारियों ने दो बड़ी अमरीकी कारगो कंपनियों-फ़ैडेक्स और यूपीएस के यमन स्थित दफ़्तर बंद करवा दिए हैं.

इन पैकेटों पर शिकागो के यहूदी उपासना स्थलों का पता लिखा था और इनमें पीईटीएन नामक विस्फोटक था जो इसके पहले यमन स्थित अल क़ायदा के लोग इस्तेमाल करते आए हैं.

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के आतंकवाद निरोधक सलाहकार जॉन ब्रैनन का दावा था कि अल क़ायदा की पूरी कोशिश है कि सुरक्षा व्यवस्था में ख़ामियों का पता लगाकर उनका फ़ायदा उठाना चाहता है.

हालांकि यमन का कहना है कि कि एक संदिग्ध उपकरण को ले जाने वाला यूपीएस विमान यमन से नहीं उड़ा था. विशेषज्ञों का मानना है कि हाल ही के कुछ महीनों में अल क़ायदा और उससे जुड़े गुटों ने यमन में क़ानून और व्यवस्था की ख़स्ता हालत का फ़ायदा उठाते हुए वहां अपने अड्डे बनाए हैं और इन पर नियंत्रण में सरकार की नाकामी की वजह से अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर और ख़तरा मंडराने लगा है.

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