बम की सूचना 'अल क़ायदा' सदस्य से

पार्सल बम

ब्रितानी अधिकारियों का कहना है कि दो मालवाहक विमानों में पार्सल बम होने की अहम सूचना के पीछे अल क़ायदा के पूर्व सदस्य का हाथ है.

अधिकारियों ने बीबीसी को बताया है कि दो सप्ताह पहले ही जबर अल-फ़ैफ़ी ने सऊदी अरब के अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण किया था.

इस बीच अमरीकी अधिकारियों का दावा है कि पिछले सप्ताह यमन से अमरीका पार्सल बम भेजने की कोशिश के पीछे बम बनाने वाले एक सऊदी नागरिक प्रमुख संदिग्ध है.

एक बम दुबई में बरामद हुआ था. लेकिन उससे पहले ये बम दो यात्री विमानों से गुज़रा था. जबकि एक अन्य पार्सल बम ब्रिटेन से होकर निकलने ही वाला था कि सूचना मिल गई.

जबर अल-फ़ैफ़ी के बारे में कहा जा रहा है कि उन्हें क्यूबा के ग्वांतानामो बे में भी रखा जा चुका है. समाचार एजेंसी एएफ़पी के मुताबिक़ ग्वातांनामो बे से निकलने के बाद वे सऊदी अरब के एक सुधार केंद्र में गए.

लेकिन इसके बाद वे यमन गए और फिर अल क़ायदा से जुड़ गए. दो सप्ताह पहले उन्होंने सऊदी अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण किया था.

संपर्क

उन्होंने सऊदी सरकार से संपर्क करके ये कहा था कि वे अपने देश लौटना चाहते हैं. सऊदी अरब के गृह मंत्रालय के एक प्रवक्ता जनरल मंसूर अल-तुर्की ने बताया कि यमन की सरकार के माध्यम से अल-फ़ैफ़ी सऊदी अधिकारियों के पास पहुँचे.

Image caption अल-फ़ैली पहले ग्वांतानामो बे में रह चुके हैं

ये भी माना जाता है कि जबर अल-फ़ैफ़ी ग्वांतानामो बे में मौजूद उन कई क़ैदियों में शामिल थे, जो दिसंबर 2006 में सऊदी अरब लौटे और सुधार केंद्र गए.

पिछले हफ़्ते दो मालवाहक विमानों में जो बम थे, उन्हें प्रिंटर के टोनर कार्ट्रिज़ में रखा गया था. इसमें शक्तिशाली प्लास्टिक विस्फोटक था, जिसका पता लगाना मुश्किल होता है.

ब्रितानी अधिकारियों की इस बात के लिए आलोचना हो रही है कि शुरुआती रिपोर्ट मिलने के बाद भी वे दो में से एक बम का पता नहीं लगा सके.

इस बीच अमरीकी ख़ुफ़िया अधिकारियों ने इब्राहिम अल-असीरी को इस नाकाम साज़िश का प्रमुख संदिग्ध बताया है. अल-असीरी की उम्र सिर्फ़ 20 साल बताई जा रही है.

ये भी माना जा रहा है कि वे यमन स्थित अल क़ायदा के प्रमुख बम बनाने वाले हैं. अधिकारियों ने समाचार एजेंसी एएफ़पी को बताया है कि असीरी का पुराना रिकॉर्ड और अनुभव दोनों उन्हें प्रमुख संदिग्ध बनाता है.

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